Gayasuddin Tuglaq:बेटे ने जिंदा ही खोद दी कब्र

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अलाउद्दीन खिलजी की मौत के बाद उसके सारे उत्तराधिकारी निकम्मे साबित हुए और वो अलाउद्दीन द्वारा खड़े किये गए विशाल साम्राज्य को संभाल नहीं पाए. साल 1320 में अलाउद्दीन खिलजी के एक सैनिक गाजी बेग तुगलक ने खिलजी वंश के आख़िरी शासक खुशरव शाह का क़त्ल सत्ता हासिल कर ली और गियासुद्दीन तुगलक के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा .
गयासुद्दीन हालाँकि शांत और उदार शासक था इसके बावजूद उसे अलाउद्दीन खिलजी से ज्यादा सफलताएं मिली. अलाउद्दीन ने कई राज्यों पर आक्रमण कर उसे जीता जरूर था लेकिन उन्हें स्वतंत्र छोड़ दिया था जबकि गयासुद्दीन ने उन राज्यों को अपने अधीन कर अपने साम्राज्य में मिला लिया .इस तरह गयासुद्दीन का साम्राज्य अलाउद्दीन की तुलना में ज्यादा बड़ा था. 

गयासुद्दीन के तलवार की धाक चारो तरफ जम चुकी थी और कोई भी उसे चुनौती देने को तैयार नहीं था. ऐसे समय में जो चुनौती उसके सामने उभरी उससे गयासुद्दीन अवाक रह गया .ये चुनौती थी उसके अपने ही बेटे उलुग खां की .उलुग खां पिता की जगह खुद सुल्तान बनना चाहता था इसलिए उसने अपने बाप के खिलाफ विद्रोह कर दिया . उलुग को सबक सिखाने सुल्तान राजधानी तुगलकाबाद की ओर बढ़ा .उलुग खां ने राजधानी से थोड़ी दूर अफ्गानपुर में एक लकड़ी का महल बनवाया था जिसकी खासियत ये थी की अगर कोई हाथी इस महल के एक विशेष स्थान पर धक्का मारे तो ये महल गिर सकता था .उलुग खां इसी महल में जा कर छिप गया .उसकी तलाश में जब सुलतान वहां पहुंचा तो उसने आत्मसमर्पण कर दिया और सुलतान से बोला की उसने हमले के दौरान जो हाथी जीता है उसे वो सुल्तान को दिखाना चाहता है .

सुलतान अपने बेटे के बहकावे में आ गया .जैसे ही हाथियों का झुण्ड बाहर निकला उलुग खान ने उन्हें उस ख़ास जगह की तरफ मोड़ दिया .हाथी धक्का मारते हुए आगे बढ़ने लगे और लकड़ी का महल भरभरा कर गिर गया जिसके नीचे दबकर गयासुद्दीन तुगलक की मौत हो गयी .इस तरह हिन्दुस्तान का एक और बादशाह अपने ही बेटे की चालबाजियों का शिकार हो गया .

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