Muhammad bin Tughluq:पागलपन और योग्यता का अद्भुत संगम था ये सुल्तान

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गयासुद्दीन तुगलक का वध उसका बड़ा बेटा खिज्र खां मुहमद बिन तुगलक के नाम से मार्च 1325 में दिल्ली की गद्दी पाकर बैठा .मुहमम्द बिन तुगलक को भारत के इतिहास का  सबसे मूर्ख ,सनकी और पागल शासक माना जाता है .हालाँकि इस बात को लेकर इतिहासकारों में काफी मतभेद है लेकिन इस बात पर सभी एकमत हैं की मुहम्मद बिन तुगलक का चरित्र काफी विरोधाभासी था  .

मुहम्मद नम्र और दम्भी था .उसने एक बार अपने काजी को हुक्म दिया कि जब वो अदालत में पेश हो तो उसके साथ एकदम साधारण आदमी जैसा बर्ताव किया जाए .मुहम्मद अदालत में पेश हुआ और उसने काजी के फैसले को स्वीकार किया. एक बार उसने अपने एक अधिकारी की ह्त्या कर दी और उसके पुत्र को आदेश दिया की सजा के तौर पर वो उसे 21 बेंत मारे और उसने ये मार खाई भी. ये तो उसके पागलपन की एक झलक भर थी .

मुहम्मद पर  एक बार अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरी ले जाने ले जाने की सनक सवार हो गई .उसने सारी जनता को आदेश दिया कि वो दो दिन के अन्दर दिल्ली को खाली कर देवगिरी को प्रस्थान करे .सारी जनता कठोर यातना सहती हुई देवगिरी पहुँची .कुछ ही दिनों बाद तुगलक ने जनता को फिर दिल्ली जाने को कहा .जिसमें उसे भारी नुक्सान उठाना पडा .

मुहमम्द को विरासत में एक विशाल साम्राज्य मिला था .शुरुआत में उसने अपने साम्राज्य का और विस्तार किया. मुहम्मद बिन तुगलक दिल्ली का पहला ऐसा शासक था जिसने भारत के सबसे बड़े भू-भाग पर शासन किया .लेकिन अपनी मूर्खता के कारण उसका साम्राज्य पूरी तरह बिखर गया. ज़िन्दगी का आखिरी वक़्त उसने केवल विद्रोह दबाने में व्यतीत किये, 1350 में गुजरात में एक बड़ा विद्रोह हो गया .जसे दबाने के लिए मुहम्मद  खुद अपनी सेना लेकर गया. जब मुहमद गुजरात का विद्रोह दबा कर लौट रहा था तभी सिंध में विद्रोह हो गया .वो अपनी सेना लेकर सिंध की ओर चल पडा .लेकिन रास्ते  में ही वो बीमार पड़ गया और 1351 में उसकी मृत्यु हो गयी. इस तरह सुलतान को अपनी प्रजा से और प्रजा को अपने इस सनकी सुलतान से मुक्ति मिल गई .

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