Firuz Shah Tughlaq: विद्रोह बहन ने किया,कीमत हिन्दुओं ने चुकाई

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मुहमद-बिन-तुगलक की मौत के समय गुजरात अभियान में फीरोज़ शाह उसके साथ था. फिरोज,मुहम्मद का चचेरा भाई था और मुहम्मद को विशेष रूप से प्रिय था. मुहम्मद बिन तुगलक की मौत के बाद उसके सरदारों ने फिरोज शाह को अगला शासक बनाने पर जोर दिया क्योंकि मुहम्मद का बेटा काफी छोटा था .सरदारों की सहमति के बाद फिरोज शाह को अगला सुलतान मान लिया गया और किसी ने इसका कोई विरोध भी नहीं किया .

फिरोज शाह के सुलतान बनने के दो साल बाद उसकी बहन खुदावंद्जादा ने रूहेलखंड के शासक खड्कू खान के साथ मिलकर सुलतान के खिलाफ विद्रोह कर दिया .फिरोज शाह इस विद्रोह को दबाने खुद जा पहुंचा .उसने अपनी बहन को तो गिरफ्तार कर लिया लेकिन खड्कू भाग निकला .फिरोज शाह ने खड्कू की इस हिमाकत का बदला उसकी प्रजा से लिया. उसने 23 हजार हिन्दुओं को बंदी बनाकर जबरन मुसलमान बना दिया और जिसने मुसलमान बनने से इनकार किया उसका क़त्ल करवा दिया. फिरोज शाह ने आदेश दिया कि रूहेल खंड को अगले पांच सालों तक हर साल पूरी तरह बर्बाद किया जाए. उसकी इस नीति के कारण रूहेलखंड के सारे लोग भाग गए और वीरान प्रान्त में केवल आवारा कुत्ते और जानवर ही नजर आने लगे.

फिरोज शाह तुगलक जब 80 साल का हुआ तो उसे अपने उत्तराधिकारी की चिंता हुई .उसने अपने बेटे नसीरुद्दीन मुहम्मद को अपने साथ सत्ता में भागीदार बनाया और शासन करने लगा .मुहम्मद निकम्मा और विलासी था .इसी बीच गुजरात में विद्रोह हो गया लेकिन मुहम्मद विद्रोह को दबाने के बजाय भोग विलास में मस्त रहा .इससे सरदार नाराज हो गए और उन्होंने विद्रोह कर महल को अपने अधिकार में ले लिया. सरदारों ने बूढ़े फिरोज शाह को पालकी में बैठा युद्धस्थल पर ले जाकर छोड़ दिया .सुलतान को सामने देख उसके सैनिकों में जोश आ गया और उन्होंने गुजरात के विद्रोह को दबाने में सफलता प्राप्त की लेकिन उसका बेटा मुहम्मद वहां से भाग निकला. इसके बाद उसने अपने पोते तुगलक शाह को अपना वारिस घोषित कर दिया .दो महीने बाद 1388 में फिरोज शाह की मौत हो गई .

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