बहलोल लोदी :बिना युद्ध के इस सुल्तान ने हथिया ली दिल्ली सल्तनत

.सुलतान अपने वजीर से नाराज हो कर बदायूं भाग गया तब वजीर हमीद खान ने बहलोल को दिल्ली बुलाया .हमीद खान चाहता था की वो बहलोल को नाम मात्र का शासक बना कर गद्दी पर बिठा देगा और खुद शासन करेगा .लेकिन ऐसा हुआ नहीं .बहलोल ने मौक़ा देखकर हमीद खान को कैद कर लिया और खुद को सुलतान घोषित कर दिया .किसी ने उसका कोई विरोध नहीं किया .इसतरह दिल्ली सल्तनत पर लोदी वंश का कब्जा हो गया .

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तुगलक वंश की समाप्ति के बाद दिल्ली की सल्तनत पर लोदी वंश का उदय हुआ जिसकी स्थापना बहलोल लोदी ने की थी. बहलोल लोदी ने इस सल्तनत को पाने के लिए ना कोई लड़ाइयाँ लड़ी और ना ही कोई खून बहाया बल्कि खुदा की नेमत की तरह ये सिंहासन उसकी झोली में आ गिरा.

तुगलक शासक मुहम्मद शाह के समय में बहलोल का चाचा इस्माइल खान सरहिंद का सूबेदार था .उसने मौत से पहले बहलोल का अपना उत्त्रधिकारी नियुक्त किया था .बहलोल ने सूबेदारी हासिल करते ही अपने आस-पास के प्रदेशों को जीत लिया और धीरे-धीरे वो मुहम्मद शाह से भी ज्यादा शक्तिशाली हो गया .सुलतान अपने वजीर से नाराज हो कर बदायूं भाग गया तब वजीर हमीद खान ने बहलोल को दिल्ली बुलाया .हमीद खान चाहता था की वो बहलोल को नाम मात्र का शासक बना कर गद्दी पर बिठा देगा और खुद शासन करेगा .लेकिन ऐसा हुआ नहीं .बहलोल ने मौक़ा देखकर हमीद खान को कैद कर लिया और खुद को सुलतान घोषित कर दिया .किसी ने उसका कोई विरोध नहीं किया .इसतरह दिल्ली सल्तनत पर लोदी वंश का कब्जा हो गया .

बहलोल लोदी एक योग्य सेनापति और निर्मम शासक था लेकिन उसके चरित्र का कुछ उज्जवल पक्ष भी था .बहलोल के गद्दी पर बैठने के बाद तुगलक वंश के उत्तराधिकारी हुसैन शाह गुम हो चुका था .उसने अपनी पत्नी मल्लिका-ए-जहाँ के उकसाने पर बहलोल के खिलाफ विद्रोह कर दिया और दिल्ली पर चढ़ाई कर दी .बहलोल ने उसे मार भगाया और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया .बहलोल जानता था की सारे फसाद की जड़ मल्लिका-ए-जहाँ ही है फिर भी उसने उसे सम्मान सहित हुसेन शाह के पास वापस भेज दिया .मध्य युग के भारत में विजयी सुलतान का ये व्यवहार अद्भुत था .

दिल्ली सल्तनत के इतिहास में बहलोल का स्थान जौनपुर की विजय,विद्रोही सरदारों का दमन और दिल्ली सल्तनत की खोई प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करने के कारण है .80 साल की उम्र में जब उसकी मौत हुई तो केवल पालम तक सिमटा दिल्ली सल्तनत पंजाब से लेकर बिहार तक फ़ैल चुका था.

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