सिकंदर शाह लोदी : हिन्दू-मुसलमान सब गिरा इस लोदी का कहर

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बहलोल लोदी के बाद उसका बेटा निजाम खां सिकंदर शाह लोदी के नाम से सिंहासन पर बैठा .सिकंदर लोदी वंश का सबसे सफल शासक सिद्ध हुआ .बहलोल लोदी ने लोदी वंश की स्थापना की थी लेकिन सिकंदर शाह ने उसे काफी विशाल बना दिया .

सिकंदरशाह इतना खूबसूरत था कि उसके कई सरदार उसके आशिक हो गए थे .उसके एक उस्ताद ने सिकंदरशाह से प्रेम निवेदन तक कर डाला जिसे मौत की सजा दी गई .सिकंदर एक योग्य शासक और कट्टर मुस्लिम शासक सिद्ध हुआ .उसने अपने राज्य की हिन्दू जनता पर काफी अत्याचार किया ,उसने मथुरा और ब्रज के कई मंदिरों को नष्ट कर दिया .नगरकोट के ज्वालामंदिर में स्थापित मूर्तियों के टुकड़े-टुकड़े कर कसाइयों को मांस तौलने के लिए दे दिया .यमुना में पिंडदान और मुंडन पर रोक लगा दी .उसने हिन्दू जनता को मुसलमान बनने के लिए काफी सताया .लेकिन सिकंदर ऐसा सिर्फ मुस्लिम सरदारों को खुश करने के लिए करता था .इस्लाम के किसी रिवाज को वो नहीं मानता था. दाड़ी ना रखना ,चोरी चोरी शराब पीना ,रोजा ना रखना और नमाज ना पढ़ना उसकी आदतों में शुमार था .उसने ताजिये निकालने पर प्रतिबन्ध लगा रखा था. उसके आदेश पर कई मस्जिद भी तोड़े गए थे .

सिकंदर लोदी की सफलता का असली राज उसका गुप्तचर विभाग था. उसने पूरे राज्य में गुप्तचरों का जाल बिछा रहा था जो हर बात की खबर उस तक पहुंचा देते थे .यही वजह है की उसके शासन में ज्यादा विद्रोह नहीं हुए .इन्हीं गुप्तचरों के कारण सिकंदर एक बार मरते-मरते बचा था .उसके दरबार के 21 सरदारों ने उसे मारकर उसके उसके भाई फतह खान को सिंहासन पर बिठाने का षड़यंत्र रचा .गुप्तचरों ने उन्हें ये सूचना दे दी और उसने सभी सरदारों का क़त्ल करवा दिया. सिकंदर शाह का गुप्तचर विभाग इतना सशक्त था की उसकी जनता का ये मानना था की भूत-प्रेत सुलतान के जासूस हैं.

गुप्तचरों की इस चुस्ती के बाद भी 1517 में बयाना में हिदुओं ने विद्रोह कर ही दिया. इस विद्रोह को दबाने के लिए सिकंदर खुद पहुंचा .जब विद्रोह दबा कर वो वापस दिल्ली लौट रहा था तभी उसके गले का जख्म नासूर बन गया और इसी कारण उसकी मौत हो गई .सिकंदर लोदी वंश का सबसे सफल शासक था इस बात को लेकर सभी इतिहासकार सहमत हैं.

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