Genghis Khan: दिल्ली के इस सुलतान ने भारत को चंगेज़ खान के कहर से ऐसे बचाया | Mix Pitara

जलालुद्दीन सिंधु नदी को पार कर भारत आ गया जहाँ उसने दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश से सहायता की फरियाद की .इल्तुतमिश ने शक्तिशाली चंगेज़ ख़ान के भय से उसको सहयता देने से इंकार कर दिया। अगर इल्तुतमिश ने उसकी सहायता की होती तो भारत को चंगेज के कहर से बचाना मुमकिन नहीं था.

0
252

भारत को कई विदेशी आक्रमणकारियों ने लूटा लेकिन ये भारत की खुशकिस्मती थी की इतिहास का सबसे महान लुटेरे चंगेज खान ने भारत को बक्श दिया .क्या भारत की शोहरत चंगेज तक नहीं पहुँची थी ? पहुँची थी और इसने भारत विजय का अपना अभियान शुरू भी किया था लेकिन वो सिंध से वापस लौट गया .

सन 1211 और 1236 ई. के बीच भारत की सरहद पर एक बड़ा भंयकर बादल उठा। यह बादल मंगोलों का था, जिसका नेता चंगेज़ ख़ाँ था। चंगेज़ ख़ाँ अपने एक दुश्मन का पीछा करता हुआ ठेठ सिंधु नदी तक आया था। चंगेज खान ने गजनी और पेशावर पर अधिकार कर लिया तथा ख्वारिज्म वंश के शासक अलाउद्दीन मुहम्मद को कैस्पियन सागर की ओर खदेड़ दिया .उसका उत्तराधिकारी जलालुद्दीन मंगवर्नी हुआ जो मंगोलों के आक्रमण से भयभीत होकर गजनी चला गया। चंगेज़ खान ने उसका पीछा किया और सिन्धु नदी के तट पर उसको हरा दिया।

जलालुद्दीन सिंधु नदी को पार कर भारत आ गया जहाँ उसने दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश से सहायता की फरियाद की .इल्तुतमिश ने शक्तिशाली चंगेज़ ख़ान के भय से उसको सहयता देने से इंकार कर दिया। अगर इल्तुतमिश ने उसकी सहायता की होती तो भारत को चंगेज के कहर से बचाना मुमकिन नहीं था.

चंगेज खान ने सिंधु नदी को पार कर उत्तरी भारत और असम के रास्ते मंगोलिया वापस लौटने की सोची। पर असह्य गर्मी, प्राकृतिक आवास की कठिनाईयों और अशुभ संकेतों के कारण वो जलालुद्दीन मंगवर्नी के विरुद्ध एक सैनिक टुकड़ी छोड़ कर वापस आ गया। इस तरह भारत में उसके न आने से तत्काल भारत एक संभावित लूटपाट और वीभत्स उत्पात से बच गया।इसके क़रीब दो सौ वर्ष बाद चंगेज़ के वंश का एक दूसरा आदमी तैमूर भारत में मार-काट और बरबादी लेकर आया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here