इब्राहीम लोदी :राजपूतों पर हमला ना केवल लोदी के लिए बल्कि भारत के लिए भी विनाशकारी साबित हुआ

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सिकंदर शाह लोदी के बाद उसका बड़ा बेटा इब्राहिम लोदी दिल्ली का सुलतान बना .इब्राहिम में अपना बाप जैसी योग्यता नहीं थी लेकिन उसके सपने काफी बड़े थे .सिकंदर शाह की कई संतानें थी .उनमें से जलाल खान ने इब्राहिम की गद्दीनशीनी का विरोध किया .सरदारों ने उसके विरोध को शांत करने के लिए इब्राहिम से कहा की वो जलाल खान को जौनपुर का भाग दे दे .हालाँकि इब्राहिम अपने साम्राज्य का विभाजन नहीं चाहता था लेकिन संघर्ष को टालने के लिए उसने हामी भर दी .

इससे पहले की जलाल खान जौनपुर पहुँच पाता इब्राहिम ने उसकी गिरफ्तारी का हुक्म जारी कर दिया .जलाल खान को गिरफ्तार कर मरवा दिया गया और इसके साथ ही इब्राहिम लोदी ने अपने सारे भाइयों को कारागार में डाल दिया ताकि भविष्य में उसके सामने कोई चुनौती खड़ी ना हो .

सिंहासन के सारे खतरों से निपटने के बाद इब्राहिम ने अपना ध्यान साम्राज्य विस्तार पर लगाया .उसने सबसे पहला आक्रमण ग्वालियर पर किया और इसमें उसकी जीत हुई .ग्वालियर की जीत से उत्साहित इब्राहिम ने मेवाड़ को जीतने की योजना बनाई .इब्राहिम का मेवाड़ पर आक्रमण ना केवल भारत के इतिहास के लिए बल्कि खुद इब्राहिम लोदी के बर्बादी का सबब बना .मेवाड़ का प्रधानमंत्री मेदिनी राय को राणा सांगा का संरक्षण प्राप्त था जो दिल्ली पर राजपूतों के शासन के सपनों को लेकर आगे बढ़ रहा था .इसलिए जब इब्राहिम लोदी ने मेवाड़ पर आक्रमण किया तो राणा सांगा मेदिनी राय के पक्ष में आ खडा हुआ .

1517 में खतौली नामक एक स्थान पर राणा सांगा और इब्राहिम लोदी के बीच भयानक युद्ध हुआ .इस युद्ध में लोदी की पराजय हुई और राणा सांगा को भी अपना एक हाथ गंवाना पडा. इस हार का बदला लेने के लिए इब्राहिम ने अगले साल फिर राणा सांगा पर आक्रमण किया इसमें भी इब्राहिम की हार हुई .इस युद्ध के बाद इब्राहिम ने सांगा पर चार और आक्रमण किये और वो हर बार हारता रहा .इस हार ने उसकी प्रतिष्ठा को धुल में मिला दिया और सांगा ने इब्राहिम के साम्राज्य के बड़े भू-भाग पर कब्जा जमा लिया .

दोस्तों .इस कड़ी के अगले भाग में हम आपको बाबर के भारत आने और इब्राहिम लोदी के पराजय के कारण के बारे में बताएंगे .की

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