बाबर के हाथों इब्राहीम लोदी की हार के साथ ही ख़त्म हो गया दिल्ली सल्तनत

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दिल्ली का सुलतान बनने के बाद इब्राहिम लोदी अफगान और राणा सांगा सहित दो मोर्चे पर जूझ रहा था.सांगा पर तो उसका वश चला नहीं लेकिन उसने अफगानों को दबाने के लिए काफी कठोरता का परिचय दिया .वो अफगानों पर बिलकुल भरोसा नहीं करता था और उन्हें निर्ममता से दंड देता था .पंजाब के गवर्नर दौलत खान ने इब्राहिम से नाराज हो कर उस पर हमला बोल दिया लेकिन इब्राहिम ने उसे मार भगाया .इस हार से तिलमिलाए दौलत ख़ाँ, ने को बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया सम्भवतः इसी समय राणा सांगा ने भी बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए निमत्रंण भेजा था।सांगा को लगा की बाबर तो लुटेरा है वो थोड़ी बहुत लूट-मार कर वापस चला जाएगा और दिल्ली पर उसकी सत्ता कायम हो जाएगी .लेकिन बाबर तो इस बार किसी और ही इरादे से भारत आया था .

1526 में बाबर एक बहुत बड़ी सेना लेकर पंजाब की ओर चल दिया। 12 अप्रैल, 1526 ई. को दोनों ओर की सेनाएँ पानीपत के मैदान में आमने-सामने आ गईं और युद्ध का आरम्भ 21 अप्रैल को हुआ। ऐसा माना जाता है कि इस युद्ध का निर्णय दोपहर तक ही हो गया। युद्ध में इब्राहीम के विश्वस्त सरदारों ने उसे धोखा दिया और बाबर से मिल गया .युद्ध में इब्राहीम लोदी बुरी तरह से परास्त हुआ लेकिन वो मैदान से भागा नहीं बल्कि अंत समय तक युद्ध करता रहा और आखिरकार मारा गया .इब्राहीम लोदी के मौत से केवल लोदी वंश ही ख़त्म नहीं हुआ बल्कि दिल्ली सल्तनत का इतिहास भी ख़त्म हो गया .

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