जब एक मामूली मुग़ल सरदार ने कर लिया बादशाह जहांगीर का अपहरण | Mix Pitara

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मुग़ल काल में एक सरदार द्वारा बादशाह जहाँगीर का अपहरण एक ऐसी घटना थी जिसे आज भी इतिहास में कादी दिलचस्पी से याद किया जाता है .एक सम्राट का एक मामूली सरदार द्वारा अपहरण वाकई एक बड़ी घटना थी .आइये जानते हैं कौन था ये सरदार और उसने क्यों किया था जहाँगीर का अपहरण ?

महावत ख़ाँ जहाँगीर का एक योग्य ,विश्वसनीय और बहादुर सिपहसलार था .जहाँगीर उस पर काफी भरोसा करता था इसलिए मलका नूरजहाँ उसकी विरोधी बन गई .नूरजहाँ उसे परेशान करने का कोई मौक़ा हाथ से जाने नहीं देती .शासन की बागडोर नूरजहाँ के हाथों में आई तो उसने महावत खान को दरबार से दूर रखने के लिए बंगाल भेज दिया .जल्द ही नूरजहाँ ने उसे परेशान करने के लिए बंगाल से गुजरात जाने को कहा. नूरजहाँ के इस व्यवहार से महावत खान बुरी तरह चिढ गया और उसने विद्रोह कर दिया .

1626 में जहाँगीर नूरजहाँ और उसके कुनबे के साथ लाहौर जा रहा था. रास्ते में झेलम नदी के किनारे महावत खान ने अपने राजपूत सरदारों के साथ इस शाही कुनबे को घेर लिया .नूरजहाँ ने सम्राट की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने भाई आसफ खान को सौंप रखी थी .महावत खान के आते ही वो भाग गया और महावत ने जहाँगीर को बंदी बनाकर अपने शिविर में कैद कर लिया .

महावत खान ने जहागीर को बंदी जरूर बनाया था लेकिन उसका कहना था की वो केवल बादशाह को बुरी संगत यानी नूरजहाँ और उसके परिवार से बचाना चाहता है .जहाँगीर को बंदी देख नूरजहाँ ने महावत खान से सुलह समझौते की कोशिश की और जहाँगीर को छोड़ने के बदले दस लाख रूपये देने की पेशकश की .महावत खान को लालच आ गया और उसने जहाँगीर को छोड़ दिया .यही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई .इस रकम को को लेकर महावत खान और राजपूत सरदारों में झगडा हो गया और नूरजहाँ के सैनिकों ने उनपर हमला बोल दिया .महावत खान वहां से डर कर भाग गया .

महावत ख़ाँ हताश होकर शाहजहाँ से मिल गया, जिसने 1626 ई. में बग़ावत कर दी थी। परन्तु उसके साथ जहाँगीर का कोई युद्ध नहीं हुआ। 1627 ई. में जहाँगीर की मृत्यु हो गई। शाहजहाँ के तख़्त पर बैठने पर महावत ख़ाँ को उच्च पदों पर नियुक्त किया गया और उसे ‘ख़ानख़ाना’ की पदवी दी गई।

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