भारत पर विदेशी हमलों की शुरुआत ईरानी शासक सायरस ने की थी |

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भारत के विभिन्न राज्यों की बीच राजनीतिक एकता की अभाव ने भारत में विदेशी आक्रमणकारियों को आक्रमण करने और लूट-खसोट करने के लिए प्रेरित किया. भारत पर पहला आक्रमण विदेशी आक्रमण करने वाले पर्सियन या इरानी थे।इतिहास में फ़ारस के ‘अख़ामनी वंश’ को ही भारत पर चढ़ाई करने वाला पहला विदेशी वंश माना जाता है। इस वंश के संस्थापक साइरस ने 551-530 के बीच अपना साम्राज्य पेशावर (अब पाकिस्तान में) से लेकर ग्रीस तक फैला लिया था।

.साइरस ने जेड्रोसिया के रेगिस्तान से होकर भारत पर आक्रमण करने का असफल प्रयास किया था.साइरस के उत्ताराधिकारी दारा प्रथम ने सिन्धु नदी के तटवर्ती भारतीय को विजित किया था.हेरोडोट्स के अनुसार ईरान साम्राज्य का बीसवाँ प्रान्त था.कम्बोज एवं गंधार पर भी उसका अधिकार था .ईरानी शासक साइरस भारत की ओर बढ़ा और उसने हिन्दुकुश पर्वतमाला तक अपना विस्तार किया, यद्यपि भारत जीतने में उसे सफलता नहीं मिली। उसका उत्तराधिकारी डेरियस प्रथम था। उसने कबोज, पश्चिमी गांधार और सिंधु क्षेत्र पर विजय प्राप्त की। हेरोडोटस का कहना है कि ईरानी शासक को भारतीय साम्राज्य से 360 स्वर्ण मुद्राएँ (जो युद्ध के पूर्व के दो लाख 90 हजार पौंड के बराबर होते थे) प्राप्त हुई। इसका उत्तराधिकारी जरक्सीज या क्षयार्ष था। उसने भी भारत के एक क्षेत्र पर अधिकार बनाये रखा और भारतीयों को सेना में नियुक्त किया।

इस आक्रमण में सायरस को हालाँकि ज्यादा सफलता नहीं मिली लेकिन उसने विदेशियों के भारत पर आक्रमण का रास्ता खोल दिया .जिसका सिलसिला मुगलों से होता हुआ अंग्रेजों तक निर्बाध रूप से चलता रहा .इन आक्रमणों ने भारत की धन संपदा को जम कर लूटा और सोने की चिड़िया कहे जाने वाले देश भुखमरी के कगार पर पहुंचा दिया .

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