जब राणा प्रताप के मुस्लिम सेनापति ने जान देकर महाराणा को दिया जीवनदान | Mix Pitara

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हल्दीघाटी के युद्ध को भारत के विनाशकारी युद्धों में से एक माना जाता है .लेकिन आपको ये जान कर हैरत होगी ये युद्ध दो धर्मो के बीच नहीं बल्कि दो शासकों के बीच थी। दरअसल ये युद्ध अकबर के सरदार मान सिंह और राणा प्रताप के अहम् का टकराव था .सबसे दिलचस्प बात ये है की इस युद्ध में राणा प्रताप के सेनापति मुस्लिम थे जो अकबर के पिट्ठू हिन्दुओं के खिलाफ लड़ रहे थे .इतना ही युद्ध के दौरान राणा प्रताप के खतरे में देख हकीम खान सूर ने मान सिंह का वार अपने सीने पर लेकर राणा प्रताप की जान बचाई थी .

1576 में महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हल्दीघाटी का युद्ध हो रहा था। इस युद्ध को इतिहास में महाभारत की तरह विनाशकारी माना जाता है। अकबर की सेना सेनापति मानसिंह के नेतृत्व में युद्ध के मैदान में अपना कौशल दिखा रही थी। मानसिंह करीब 50 हजार घुड़सवार और 35 हजार पैदल सैनिकों के साथ आगे बढ़ रहे थे। लेकिन वीर महाराणा प्रताप सिर्फ 20 हजार सैनिकों के साथ अकबर की सेना से लोहा ले रहे थे।महाराणा प्रताप चेतक पर सवार दुश्मनों के सिर धड़ से अलग करते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे। ये देख मानसिंह भयभीत हो गए। उन्होंने अपनी सेना का ध्यान महाराणा प्रताप की ओर किया। जिसके बाद सैनिकों ने उनपर हमला बोल दिया।

वैसे तो 10 हजार सैनिकों पर राणा का वार भारी पड़ता था। लेकिन कहा जाता है कि जब सैनिकों ने उनपर हमला किया तो वो संभल नहीं पाए और सेना उनपर हावी होने लगी। ये देख माहाराणा प्रताप के वफादार हकीम खान सूर मैदान में कूद गए और अकबर की सेना का वार खुद सहन कर उनकी जान बचा ली।

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