बप्पा रावल :भारत का पहला शासक जिसने विदेशो पर आक्रमण कर सिंध और ईरान को भारत का हिस्सा बना दिया

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भारतीय इतिहास गवाह है कि भारतीय शासकों ने कभी बाहरी देशों पर आक्रमण नहीं किया .हालत कुछ ऐसे थे की राजाओं की पूरी शक्ति अपने ही देश को बाहरी आक्रमणों से बचाने में लग जाती थी .लेकिन राजस्थान में एक शासक ऐसा हुआ जिसने ना केवल मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद बिन कासिम को भारत से खदेड़ा बल्कि आगे बढ़ते हुए उन्होंने सिंध सहित गजनी और ईरान पर भी भारतीय झंडा फहरा दिया .ये शासक थे बप्पा रावल .महाराणा प्रताप इन्हीं के वंशज थे .

बप्पा रावल गहलौत राजपूत वंश के आठवें शासक थे और उनका बचपन का नाम राजकुमार कलभोज था। बप्पा रावल की विशेष प्रसिद्धि अरबों से सफल युद्ध करने के कारण हुई। सन् 712 ई. में बप्पा रावल ने मुहम्मद बिन क़ासिम से सिंधु को जीता। मोहम्मद बिन कासिम के अत्याचार की खबर जब राजस्थान के हिन्दू शेर योद्धा बप्पारावल तक पहुंची उन्होंने तुरन्त अपनी सेना को इकट्ठा कर युद्ध की तैयारी शुरू कर दी। बाप्पा ने अजमेर और जैसलमेर जैसे छोटे राज्यों को भी अपने साथ मिला लिया और एक बलशाली शक्ति खड़ी की। मोहम्मद बिन कासिम की टक्कर लेना आसान नहीं था। इसके पास लाखों सैनिकों की सेना थी। कई लाख तो इसकी सेना में धोड़े ही थे। राजा दाहिर के पुत्र जयसिंह ने कासिम से डरकर जान बचाते हुए चित्तोड़ में शरण ली थी। कासिम ने चित्तोड़ पर हमला किया और यहाँ भयंकर युद्ध हुआ इस युद्ध में मोहम्मद बिन कासिम की हार हुई और वो जान बचाकर सिंध भाग गया। बप्पारावल सिंध के पश्चिमी तट तक कासिम को मारते हुए लेकर गये थे इसके बाद बप्पारावल ने गजनी पर भी आक्रमण किया था और वहां के राजा सलीम को बुरी तरह से हराया था। गजनी पर कब्ज़ा करने की बाद गांधार, खुरासान, तूरान और ईरान को भी अपने राज्य में मिला लिया था।

बप्पा रावल एक न्यायप्रिय शासक थे। वे राज्य को अपना नहीं मानते थे, बल्कि शिवजी के एक रूप ‘एकलिंग जी’ को ही उसका असली शासक मानते थे और स्वयं उनके प्रतिनिधि के रूप में शासन चलाते थे। लगभग 20 वर्ष तक शासन करने के बाद उन्होंने वैराग्य ले लिया और अपने पुत्र को राज्य देकर शिव की उपासना में लग गये। महाराणा संग्राम सिंह (राणा सांगा), उदय सिंह और महाराणा प्रताप जैसे श्रेष्ठ और वीर शासक उनके ही वंश में उत्पन्न हुए थे। उन्होंने अरब की हमलावर सेनाओं को कई बार ऐसी करारी हार दी कि अगले 400 वर्षों तक किसी भी मुस्लिम शासक की हिम्मत भारत की ओर आंख उठाकर देखने की नहीं हुई।

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