पोती ने औरंगजेब को बताई हिन्दुओं की महानता ,फूट-फूट कर रोया क्रूर तानाशाह | Mix Pitara

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औरंगजेब को मुग़ल बादशाहों में सबसे क्रूर ,निर्मम और अत्याचारी शासक कहा जाता है .इन सब बातों के बावजूद औरंगजेब में कुछ गुण भी थे। वह अच्छा सेनापति और चतुर कूटनीतिज्ञ था। महान मुगलों में वही था जो यथासम्भव सादगी से रहने का प्रयास करता था।

औरंगजेब कुरान की प्रतियाँ बनाकर बेचता था और अपना व्यक्तिगत खर्चा उसी से चलाता था .वैसे इस बात पर यकीन करना मुश्किल है लेकिन इतिहासकारों ने ऐसा ही लिखा है . औरंगजेब कर्मठ बादशाह था और उसे कुरान की प्रतियाँ बनाने का समय मिलने की सम्भावना बहुत ही कम कही जा सकती है।इस्लाम की रीतियों के पालन पर दृढ़ रहने के कारण उसे लोग जिन्दा पीर कहते थे। नमाज को लेकर वो इतना सख्त था कि बल्ख के युद्ध के दौरान बीच मैदान में उसे नमाज पढ़ना शुरू कर दिया जबकि वो चरों तरफ दुश्मनों से घिरा हुआ था. कभी कभार आवेश में आकर वह क्रूरता कर जाता था पर यह भाव उसमें अस्थायी था।

यह जानना रोचक होगा कि शम्भाजी की मृत्यु के बाद औरंगजेब ने उसकी पत्नी येसूबाई और पुत्र शाहू को अपने संरक्षण में रखा था। औरंगजेब की बेटी जीनत उन्निसा ने शाहू की देखभाल अपने बेटे की तरह से की थी। शाहू उसे माँ और औरंगजेब को नाना कहता था।

बुढ़ापे में औरंगजेब अपनी गलतियों पर अफसोस करता था। अपने बेटे कामबख्श को लिखे पत्र में उसने कहा है कि प्रभुस्मरण के सिवा मैंने जीवन में जो भी किया है वह व्यर्थ ही किया है। यह भी उल्लेख मिलता है कि मारवाड़ से हुए युद्ध के दौरान मारवाड़ के योद्धा दुर्गादास राठौर ने उसकी पोती शाहजादा अकबर की बेटी जो अकबर के ईरान भागने के दौरान उनके पास छूट गयी थी।) को उसके पास भेज दिया। औरंगजेब यह जानकर आश्चर्य में पड़ गया कि दुर्गादास ने उसकी पोती की शिक्षा की उचित व्यवस्था की थी और उसकी पोती कुरान ढंग से पढ़ सकती थी। उस समय उसे यह सोचकर बहुत अफसोस हुआ कि उसने हमेशा हिन्दुओं को इस्लाम का शत्रु समझा था

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