महाराणा प्रताप की मृत्यु पर अकबर क्यों रोया था?

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महाराणा प्रताप के नाम से भारतीय इतिहास गुंजायमान है। आज से 441 साल पहले एक भीषण युद्ध हुआ था, जिसे हम सब हल्दीघाटी के युद्ध के रूप में जानते हैं। यह युद्ध इतिहास का सबसे चर्चित युद्ध रहा है, जिसने पूरे विश्व को प्रभावित किया है l इस युद्ध के महानायक थे महाराणा प्रताप। एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन भारत के दौरे पर आ रहे थे, तो उन्होंने अपनी मां से पूछा… मैं आपके लिए भारत से क्या लेकर आऊं, तो उनकी मां ने कहा था भारत से तुम हल्दीघाटी की मिट्टी लेकर आना जिसे हजारों वीरों ने अपने रक्त से सीचा है।महाराणा प्रताप का कट्टर शत्रु भी उनकी वीरता का कायल था .कहा जाता है की प्रताप की मृत्यु की खबर सुनकर अकबर की आँखें भर आई थी .

उस समय लगभग पूरे भारत में अकबर का साम्राज्य स्थापित हो चुका था l तब महाराणा प्रताप अकेले ही ऐसे राजा थे जिन्होंने अकबर के सामने खड़े होने का साहस किया। वह जीवन भर संघर्ष करते रहे लेकिन कभी भी मुगलों के सामने झुके नहीं। अकबर ने महाराणा प्रताप को अधीनता स्वीकार करवाने के लिए चार बार शांतिदूत भेजें, ताकि वह वार्ता से महाराणा प्रताप को अपने अधीन कर सकें। अकबर ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर महाराणा प्रताप उनकी सियासत को स्वीकार करते हैं तो उन्हें आधे हिंदुस्तान की सत्ता सौंप दी जाएगी । लेकिन कोई भी प्रलोभन महाराणा के मजबूत इरादों को टीका ना सका। इसके बाद हुआ इतिहास प्रसिद्ध हल्दीघाटी का युद्ध, जिसमें महाराणा प्रताप के पास सिर्फ 15000 सैनिक थे, और अकबर के पास थे पचास हजार सैनिकों की फौज। अकबर की विशाल सेना और संसाधनों के बावजूद महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी, और वह मातृभूमि के सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहे। हल्दीघाटी का युद्ध इतना भयंकर था की युद्ध के 300 वर्ष बाद वहां तलवारें पाई जाती है। आखरी बार वहां तलवारों का जखीरा 1985 को हल्दी घाटी में मिला था।

इस युद्ध में महाराणा प्रताप का प्रिय घोड़ा चेतक ने अपनी जान दांव पर लगाकर 26 फीट लंबी दरिया को कूटकर महाराणा प्रताप की रक्षा की थी। हल्दीघाटी युद्ध के पश्चात महाराणा प्रताप परिवार सहित जंगलों में चले गए, जंगलों और पहाड़ों में भूखे रह कर भी उन्होंने अपनी सेना संगठित करना जारी रखा। उस समय प्रताप के लिए परिस्थितियां बहुत खराब हो चुकी थी। वह जंगल में उगने वाली घास के बीजों की रोटियां पका कर खाते थे l15 जनवरी 1597 में शिकार करते समय वह अपने धनुष के टूट जाने से घायल हो गए जिसकी वजह से उनकी मृत्यु हो गई.  ऐसा कहा जाता है कि प्रताप की मृत्यु की खबर सुनकर अकबर की आंखों में भी आंसू आ गए थे  क्योंकि वह जानता था कि महाराणा प्रताप जैसा वीर पूरे विश्व में कहीं नहीं है।

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