जब शाहजहाँ ने अपने साले शायस्ता खान की बीबी को जबरन अपने हरम में पहुंचवा दिया

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मुमताज़ के जीवित रहने तक शाहजहाँ एक समर्पित प्रेमी बना रहा लेकिन मुमताज़ की मौत के बाद उसे जैसे औरतों से वितृष्णा सी हो गई .शायद प्रेम से उसका विश्वास पूरी तरह उठ चुका था .अब वो एक कामुक,विलासी और व्यभिचारी शख्स में तब्दील हो चुका था .शाहजहाँ के इस नए रूप से उसके दरबारियों के लिए अपनी इज्जत बचानी मुश्किल हो गई क्योंकि शाहजहाँ सरदारों की शादीशुदा बीबियों को अपना हमबिस्तर बनाने लगा .शाहजहाँ ने कामुकता और व्याभिचार को परवान चढाने के लिए महल के भीतर लगने वाले मीना बाजार को निशाना बनाया .आइये जानते हैं इस मीना बाजार के बारे में

महल के भीतर मीना बाजार लगाने की शुरुआत शाहजहाँ के दादा अकबर ने की थी .महल के अन्दर एक साल में सात दिनों के लिए भव्य बाजार लगता जिसमें केवल स्त्रियों और हिजड़ों को ही आने की अनुमति थी .कोई भी मर्द इस बाजार के आस-पास भी नहीं फटक सकता था. शाहजहाँ इस बाजार में हर दिन दो बार चक्कर लगाता और सुन्दर स्त्रियों को अपनी नजरों से तौलता रहता .जो भी उसे पसंद आ जाती उसे उठाकर शाहजहाँ की रातों का मेहमान बना दिया जाता .एक बार उसने अपने साले शायस्ता खान की बीबी को उठवा लिया .जब शायस्ता खान ने इसका विरोध किया तो उसने खान को अपने शयनकक्ष के बाहर पहरे पर बिठा कर उसकी बीबी के साथ रात गुजारी और शायस्ता खान कुछ नहीं कर पाया .
मुमताज़ के बाद शाहजहाँ ने और कोई शादी नहीं की .उसका हरम नई-नई औरतों से भरता रहा और धीरे-धीरे बादशाह एक कामुक और विलासी शासक में बदल गया .

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