औरंगजेब के बेटे मुअज्जम ने ऐसे चुकाया शिवाजी महाराज के एहसान का बदला

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मुग़ल सम्राट औरंगजेब एक ऐसा शासक था जिसने क्रूरता बरतने में अपने-परायों में कोई भेद नहीं किया .उसके बेटे अपने बाप कीे इस आदत से काफी खौफजदा रहते थे .उसका सबसे बड़ा बेटा शहजादा मुअज्जम अपने बाप से नफरत करता था और औरंगजेब भी अपने इस शहजादे को सबक सिखाने में कोई कोताही नहीं बरतता था .औरंगजेब से परेशान मुअज्जम अपने बाप के दुश्मनों के खिलाफ काफी नरम रुख अपनाता था ताकि आगे चलकर इसका फायदा उठा सके .ये शायद उसके चरित्र की खासियत भी रही होगी .मराठों के मामले में तो उसकी ये विशेषता खुलकर सामने आई जब उसने शिवाजी महाराज के एहसानों का बदला चुकाया .

औरंगजेब के लिए शिवाजी महाराज हमेशा टेढ़ी खीर साबित होते रहे .जब उन्होंने गुजरात में जबरदस्त लूटमार मचाई तो औरंगजेब ने अपने मामा शायस्ता खान को शिवाजी को सबक सिखाने भेजा . एक रात शिवाजी ने अपने 350 मवलो के साथ उनपर हमला कर दिया। शाइस्ता तो खिड़की के रास्ते बच निकलने में कामयाब रहा पर उसे इसी क्रम में अपनी चार अंगुलियों से हाथ धोना पड़ा। इस घटना से बौखलाए औरंगजेब ने अपने बेटे शाहजादा मुअज्जम को शिवाजी के खिलाफ भेजा. दरअसल मुअज्जम पहले से ही शिवाजी से खौफ खाता था इसलिए उसने लड़ाई तो शुरू की लेकिन जान-बूझ कर हार गया .शिवाजी ने उन्हें कैद कर लिया .

मुअज्जम आठ सालों तक शिवाजी की कैद में रहा लेकिन महाराज ने कभी उनके साथ बुरा बर्ताव नहीं किया . मुग़ल सम्राट शाहजहाँ के साथ हुए संधि के कारण मुअज्जम को छोड़ दिया गया .कैद में मराठों द्वारा किया गया बर्ताव मुअज्जम को याद रहा .औरंगजेब की मौत के बाद जब वो बहादुरशाह के नाम से मुग़ल सम्राट बना तो उसने औरंगजेब की कैद में रह रहे शिवाजी के पोते और संभा जी के पुत्र शाहू महाराज को ना केवल मुक्त कर दिया बल्कि उत्तराधिकार की लड़ाई में भी उसने शाहू जी महाराज का साथ दिया. इस तरह इस मुग़ल शहजादे ने मुगलों के सबसे बड़े शत्रु शिवाजी महाराज के एहसान का बदला चुका दिया .

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