जानिए ! औरंगजेब की बहन जहाँ आरा को राजा छत्रसाल से मुहब्बत की क्या कीमत चुकानी पडी

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अकबर ने केवल इसलिए कि मुग़ल राजकुमारियां/ शहजादियाँ हिन्दू राजाओं व राजकुमारों से विवाह न कर ले, उनके विवाह पर ही प्रतिबन्ध लगा दिया. यह प्रकृति के नियमों के विरुद्ध प्रतिबन्ध आगे भी चलता रहा, जिस कारण मुग़ल शहजादियों में अवैध संबंधों की भरमार हो गयी. औरंगजेब की बहन जहाँ आरा के बूंदी के राजा छत्रसाल से सम्बन्ध जग जाहिर थे. जहाँ आरा ने अपने दूसरे भाई दारा शिकोह से वचन लिया था कि यदि वह बादशाह बन जाएगा तो उसकी शादी करवा देगा. दुर्भाग्य से दारा शिकोह औरंगजेब के हाथो मारा गया, और जहाँ आरा को कुंवारी ही मरना पड़ा. उसकी कब्र निजामुद्दीन औलिया के मकबरे में बनायी गई, क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उसे किसी मुग़ल कब्रगाह या मकबरे में गाडा जाए.

जब औरंगजेब मुग़ल गद्दी पर बैठा तो उसने राजा छत्रसाल को सबक सिखाने की ठानी .औरंगजेब छत्रसाल को पराजित करने में सफल नहीं हो पाया। उसने रणदूलह के नेतृत्व में 30 हजार सैनिकों की टुकडी मुगल सरदारों के साथ छत्रसाल का पीछा करने के लिए भेजी थी। छत्रसाल अपने रणकौशल व छापामार युद्ध नीति के बल पर मुगलों के छक्के छुड़ाता रहा। छत्रसाल को मालूम था कि मुगल छलपूर्ण घेराबंदी में सिद्धहस्त है। उनके पिता चंपतराय मुग़लों से धोखा खा चुके थे। छत्रसाल ने मुगल सेना से इटावा, खिमलासा, गढ़ाकोटा, धामौनी, रामगढ़, कंजिया, मडियादो, रहली, रानगिरि, शाहगढ़, वांसाकला सहित अनेक स्थानों पर लड़ाई लड़ी। छत्रसाल की शक्ति बढ़ती गयी। बन्दी बनाये गये मुगल सरदारों से छत्रसाल ने दंड वसूला और उन्हें मुक्त कर दिया। बुन्देलखंड से मुगलों का एकछत्र शासन छत्रसाल ने समाप्त कर दिया।औरंगजेब और छत्रसाल की दुश्मनी के बीच जहाँ आरा एक महत्वपूर्ण कड़ी थी.

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