जानिए ! राणा संग्राम सिंह ने दिल्ली के सुलतान इब्राहिम लोदी की जान क्यों बख्शी

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इब्राहिम लोदी के पिता का सपना था कि वह किसी भी तरह से ग्वालियर के किले पर कब्जा कर सकें. इसके लिए उनके पिता ने ग्वालियर के किले पर कई बार कब्जा करने की नाकाम कोशिश की. हालांकि, वह इसमें कामयाब नहीं हो सके. बाद में अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए इब्राहिम लोदी ने उस पर हमला किया.उसे अपने पिता के द्वारा किया गया हमलों के बारे में अच्छी तरह से जानाकारी थी. वह उन कारणों को भी जानता था, जिस कारण उसके पिता उस किले को जीत नहीं पा रहे थे. इसके चलते उसने सारी खामियों को दूर करते हुए अपनी पूरी सेना को तैयार किया.एक खास रणनीति के चलते वह अपनी सेना के साथ आगे बढ़ा. जल्द ही वह दुश्मन सेना को हराने में कामयाब रहा और इस तरह उसने ग्वालियर का किला फतह किया. असल में इस दौरान ग्वालियर के राजा मान सिंह की मृत्यु हो गई थी… इस कारण बचे हुए छोटे शासकों को मजबूरन उसके सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा था.लेकिन इब्राहिम की इस फतह ने राणा संग्राम को बुरी तरह नाराज कर दिया। संग्राम सिंह लोदी को सबक सिखाने की ठानी।

इब्राहिम लोदी को लेकर उसकी सेना में असंतोष था, इस लिहाज से उसके राजवंश पर विरोधियों का हमला करना लाजमी था. कहते हैं कि इसी कड़ी में उसका सामना सबसे पहले मेवाड़ के राजा ‘राणा सग्राम सिंह’ का सामना करना पड़ा. गजब की बात तो यह थी कि इब्राहिम लोदी को इस बात की खबर तक नहीं थी कि उसके ऊपर हमला होने वाला है. जबकि 1519 के आसपास राणा संग्राम सिंह ने उसके खिलाफ अपनी सेना को तैयार कर चुके थे.

इब्राहिम को जब तक इसकी खबर मिलती ‘राणा संग्राम सिंह’ चढ़ाई कर चुके थे. आनन-फानन में वह अपनी सेना के साथ राणा संग्राम सिंह को रोकने के लिए पहुंचा. इस युद्ध को जीतने के लिए उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी. वह बात और है कि वह अपनी हार को टाल नहीं सका. असल में महाराणा पूरी तैयारी के साथ आए थे. वह दो सेनाओं के साथ आए थे और योजना के तहत अपनी एक सेना को खतौली गांव की सीमाओं के पास खड़ा कर रखा था.

इब्राहिम लोदी इस योजना को समझ नहीं सका और हार के बाद बंदी बना लिया गया. कहते हैं कि इस लड़ाई में महाराणा ने तलवार से कटने के कारन अपना एक हाथ खो दिया था.बंदी बनाए जाने के बाद इब्राहिम लोदी अपनी प्रतिष्ठा भूल कर राणा के सामने गिड़गिड़ाने लगा। उसने राजपूतों के विजिट सभी इलाकों को छोड़ने का वादा कर खुद की जान बचाई।

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