Gayasuddin Balwan:इस सुल्तान के दरबार में मुस्कुराने की सजा मौत थी

0
262

गयासुद्दीन बलबन गुलाम वंश के सुल्तान और एक बेहद चतुर सैन्य प्रमुख शासक थे। गयासुद्दीन बलबन एक सम्पन्न इलाबरी जन जाति के तुर्क परिवार से थे। लेकिन दुर्भाग्य से, मंगोलों द्वारा गयासुद्दीन को बन्दी बना लिया गया था और बगदाद में ख्वाजा जमाल-उद-दीन के हाथों एक दास के रूप में बेच दिया और उसके बाद उन्हें दिल्ली लाया गया, जहाँ उन्हें इल्तुतमिश ने एक गुलाम के रूप में खरीद लिया। जल्द ही गयासुद्दीन सुलतान का प्रिय पात्र बन गया . नसीर-उद्-दीन की मृत्यु के बाद गयासुद्दीन ने षड्यंत्र के जरिये सत्ता हथिया ली और दिल्ली के सुलतान बन बैठे.

एक सुल्तान के रूप में गयासुद्दीन बलबन ने अपने राज्य में बहुत ही कठोरता के साथ शासन किया।गयासुद्दीन बलबन का यह मानना था कि धरती पर एक राजा ईश्वर का उपासक होता है और जिसे अद्वितीय शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। वो खुद को नायब -ए-खुदाई कहता था ।। बलबन का दरबार बहुत ही अनुशासित था और कोई भी व्यक्ति उसके दरबार में मुस्कुराने की हिम्मत नहीं कर सकता था। दरबार में मुस्कुराने के कारण कई दरबारियों को अपनी जान से हाथ धोना पडा था.

गयासुद्दीन बलबन के शासनकाल के आखिरी दिनों में बंगाल के शासक तुगरल बेगने ने उनके शासन के खिलाफ विरोध किया। जैसा कि राजा बूढ़ा हो चुका था और बंगाल दिल्ली से बहुत दूर था, इसलिए उन्होंने विद्रोही सैनिकों से युद्ध करने के लिए अपनी सेना भेजी थी। सेना पराजित हो चुकी थी और जब बलबन द्वारा सेना का नेतृत्व किया गया तब विशेष रूप से गयासुद्दीन बलवन ने पश्चिम बंगाल पर फिर से विजय प्राप्त कर ली थी। इसके बाद गयासुद्दीन बलबन ने अपने बेटे बुगरा ख़ाँ को बंगाल का शासक घोषित कर दिया था।

1279 और 1285 ईस्वी के हमलों में मंगोलों को पराजित किया था, हालांकि, गयासुद्दीन बलबन ने युद्ध में अपने बेटे मोहम्मद को खो दिया था। अपने बेटे की मृत्यु से गयासुद्दीन बहुत ज्यादा टूट चुके थे और इस वजह से गयासुद्दीन बलबन की 1287 में मृत्यु हो गई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here