रामप्यारी गुर्जरी :इस वीरांगना का साहस देख घबरा उठा तैमूरलंग

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जब-जब तैमूरलंग बनाम सर्वखाप लड़ाई का इतिहास लिखा जाएगा तो दादीराणी रामप्यारी गुर्जरी जी की कहानी भी स्वत: गाई जाएगी।1398 ई में तैमूर ने भारत पर क्रूर हमला किया। तैमूर क्रूर और खुली लूटपाट की साथ ही दिल्ली में खून की नदियाँ बहाता हुआ उत्तर भारत की तरफ बढ़ा। एक महापंचायत में सभी समाज के लोगो ने तैमूर की सेना से छापामार युद्ध लड़ने की रणनीति बनायीं और महापंचायत ने सर्व समाज की एक सेना तेयार की। इस ध्वज के तहत 80,000 योद्धा सैनिकों और 40,000 युवा महिला सेनिक हथियाओं के साथ शामिल हुए थे. महिला सैनिकों  की कमांडर राम प्यारी गुर्जर थी। रामप्यारी के नेतृत्व मे इस महिला सेना का गठन ठीक उसी ढंग से किया था जिस ढंग से सेना का था।

प्रत्येक गांव के युवक-युवतियां अपने नेता के संरक्षण में प्रतिदिन शाम को गांव के अखाड़े पर एकत्र हो जाया करते थे और व्यायाम, मल्ल विद्या तथा युद्ध विद्या का अभ्यास किया करते थे। गांव के पश्चात खाप की सेना विशेष पर्वों व आयोजन पर अपने कौशल सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित किया करती थी। सर्व खाप पंचायत के सैनिक प्रदर्शन यदा-कदा अथवा वार्षिक विशेष संकट काल में होते रहते थे| लेकिन संकट का सामना करने को सदैव तैयार रहते थे। इसी प्रकार रामप्यारी गुर्जरी की महिला सेना पुरूषों की भांति सदैव तैयार रहती थी। ये महिलाएं पुरूषों के साथ तैमूरलंग के साथ युद्ध में कन्धे से कन्धा मिला कर लड़ी।

दादीराणी रामप्यारी गुर्जरी के रण-कौशल को देखकर तैमूर दांतों तले अंगुली दबा गया । उसने अपने जीवन में ऐसी कोमल अंगों और  बारीक आवाज वाली बीस वर्ष की महिला को इस प्रकार 40 हजार औरतों की सेना का मार्गदर्शन करते हुए ना कभी नहीं देखा था और ना सुना था। तैमूर इनकी वीरता देखकर वह घबरा उठा था।इन्होने बहुत बाहदुरी के साथ तैमूर  की सेना का मुकाबला किया। इस युद्ध में सभी समाज के लोगो ने भाग लिया था। इस युद्ध मे बुरी तरह घायल होने के कुछ दिनों बाद ही तेमूर लंग की मौत हो गई

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