Harveer Singh Gulia:तैमूर लंग का काल साबित हुआ ये जाट कमांडर

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हरियाणा की खाप पंचायत आजकल भले ही गलत कारणों से चर्चा में रहती हो लेकिन इस गोत्र ने भारत की अस्मिता को बनाए रखने के लिए काफी बलिदान दिया है. जब विदेशी आक्रमणकारी भारत की सम्रद्धि और गौरव को अपने पैरों के नीचे रौंद रहे थे और भारतीय राजा अपनी-अपनी गोटियाँ बिठाने में मशगूल थे तब हरियाणा के वीरों ने इन आक्रमणकारियों के खिलाफ तलवार उठाई और उन्हें भागने के लिए मजबूर कर दिया. इन्हीं में से एक थे सेनापति हरबीर सिंह जी गुलिया ,जिन्होंने क्रूर तैमूर लंग को ना केवल भारतीय शक्ति का अहसास करवाया बल्कि उसकी मौत के कारण भी बने.

1398 तैमूरलंग ने भारत पर आक्रमण कर ना केवल विशाल संपदा लूटी बल्कि यहाँ खून की नदियाँ भी बहा दी. उसने लाखो हिन्दुओं का सर काट कर मीनारें बनवाई .तैमूर के अत्याचारों से हरियाणा के वीरों का खून खुल उठा और उन्होंने उसे सबक सिखाने की योजना बनाई. तुरत-फुरत सर्वखाप की महापंंचायत बुलाई गई। इसमें सेना के प्रधान सेनापति और अन्य सेनापति तय किए गए। खास बात ये थी कि इस सेना में जाट, गुर्जर, दलित सभी जातियों का प्रतिनिधित्व था। इस सेना के प्रधान सेनापति बनाए गए महाबली दादावीर जोगराज और हरवीर सिंह गुलिया को उपसेनापति बनाया गया .इस सेना में रामप्यारी गुर्जर भी अपनी चालीस हजार महिला सेना के साथ शामिल थी.

जब तैमूर 1399 में दिल्ली को लूटने के बाद वापस अपने देश जा रहा था तब उप-प्रधानसेनापति हरबीर सिंह गुलिया ने अपने पंचायती सेना के 25,000 वीर योद्धा सैनिकों के साथ तैमूर के घुड़सवारों के बड़े दल पर भयंकर धावा बोल दिया जहां पर तीरों तथा भालों से घमासान युद्ध हुआ।हरबीरसिंह गुलिया ने आगे बढ़कर शेर की तरह दहाड़ते हुए तैमूर की छाती में भाला मारा जिससे वह घोड़े से नीचे गिरने ही वाला था कि उसके एक सरदार खिज़र ने उसे सम्भालकर घोड़े से अलग कर लिया। वीर योद्धा हरबीरसिंह गुलिया पर शत्रु के 60 भाले तथा तलवारें एकदम टूट पड़ीं जिनकी मार से यह योद्धा अचेत होकर भूमि पर गिर पड़ा।“`तैमूर इसी भाले के घाव से ही अपने देश समरकन्द में पहुंचकर मर गया।

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