जब जहाँगीर ने अपने बेटे को अंधा कर गुसलखाने में बंद करवाया

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मुग़ल सम्राट जहाँगीर को काफी ‘मूडी’ बादशाह कहा जाता है . कभी बहुत दरियादिल तो कभी बहुत ख़ूंख़ार.जहाँगीर की क्रूरता का ब्यौरेवार वर्णन एलिसन बैंक्स फ़िडली ने अपनी किताब ‘नूरजहाँ: एंपरेस ऑफ़ मुग़ल इंडिया’ में किया है. अकबर और जहाँगीर के रिश्ते कभी सहज नहीं रहे. उनमें और कटुता तब आ गई जब जहाँगीर ने अकबर के बहुत करीबी और उनके जीवनीकार अबुल फ़ज़ल को ओरछा के राजा बीर सिंह देव के हाथों उस समय कत्ल करवा दिया था, जब वो दक्कन से आगरा की तरफ़ आ रहे थे.

अबुल फज़ल अकबर का काफी करीबी था .एक बार उसे भनक लगी की जहाँगीर अपने पिता के खिलाफ विद्रोह की योजना बना रहा है. जैसे ही उसे खबर मिली वो बादशाह को खबरदार करने आगरा की तरफ बढ़ा .जहाँगीर फज़ल को हर कीमत पर रोकना चाहता था. इसलिए उसने राजपूत सरदार बीर सिंह को उसके पीछे लगा दिया . “तेज़ भागते घोड़े पर सवार बीर सिंह ने अबुल फ़ज़ल पर बर्छे से इतनी तेज़ी से वार किया कि वो उनके शरीर के दूसरे हिस्से से बाहर निकल गया. फ़ज़ल नीचे गिरे और उनके शरीर से तेज़ी से ख़ून निकलने लगा. उनका ख़ुद का घोड़ा उन्हें रौंदता हुआ निकल गया. ताज्जुब है कि घोड़े के भार से उनकी मौत नहीं हुई. फ़ज़ल अभी जीवित थे कि बीर सिंह वहाँ पहुंच गए. वो उनकी बग़ल में बैठ गए. उन्होंने अपनी जेब से एक सफ़ेद कपड़ा निकाला और फ़ज़ल के जिस्म से निकल रहे ख़ून को पोंछने लगे. इसी समय फ़ज़ल ने अपनी सारी ताक़त जुटाते हुए बुंदेला प्रमुख की ग़द्दारी के लिए उसे कोसा. बीर सिंह ने अपनी तलवार निकाली और एक झटके में अबुल फ़ज़ल का सिर उनके धड़ से अलग कर दिया.जब अकबर को अबुल फ़ज़ल के देहांत के बारे में ख़बर मिली तो वो मूर्छित हो गए. जहाँगीर जब बादशाह बना तो उसने अबुल फज़ल के बेटे को अपना प्रधान मंत्री नियुक्त किया .

ख़ुद के बेटे ख़ुसरो के बग़ावत करने पर जहाँगीर ने उसे मौत की सज़ा न दे कर उसकी आँखें फुड़वा दी थीं.”एक बार इस तरह की सज़ा देने के बाद शायद ही जहाँगीर ने उसे बदला हो. हाँ अपने बेटे ख़ुसरो को अंधा किए जाने के बाद, जहाँगीर ने उसकी आँखों का इलाज ज़रूर करवाया था, लेकिन उसकी आँखों की रोशनी कभी वापस नहीं आई.”

“जहाँगीर ने अपने एक नौकर का अंगूठा सिर्फ़ इसलिए कटवा दिया था, क्योंकि उसने नदी के किनारे लगे चंपा के कुछ पेड़ काट दिए थे. उसने नूरजहाँ की एक कनीज़ को एक गड्ढ़े में आधा गड़वा दिया था. उसका कसूर था एक किन्नर का चुंबन लेते पकड़े जाना. एक आदमी को उसके पिता की हत्या करने की सज़ा देते हुए जहाँगीर ने उसे एक हाथी की पिछली टांग से बंधवा कर कई मीलों तक खिंचवाया था.”

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