जब चौदह साल लड़के के प्यार में दीवाना हो गया बाबर

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भारत के इतिहास में कुछ इतिहासकारों ने मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक बाबर को एक योद्धा,विशाल ह्रदय और दूरदर्शी शासक के रूप में पेश किया है जबकि सच इससे बिलकुल अलग है .बाबर एक विलासी ,शराबी और क्रूर शासक था .युद्ध में हारे हुए राजाओं के पूरे परिवार की महिलाओं को वो अपने हरम का हिस्सा बना लेता और अपने सरदारों को तोहफे दे देता .आपको जानकर हैरानी होगी की बाबर एक समलैंगिक शख्स था .इसलिए उसे औरतों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी ,आइये जानते हैं बाबर के बारे में 

बाबर जब  महज 16-17 साल का था तब उसको बाबुरी नामक एक लड़के  से  प्रेम हो गया था. इसको लेकर बाबर ने आशिकी पर शेर लिखे थे, इन्हीं दिनों बाबर के जीवन में उसके मामा की लडकी आयशा बेगम आई.अब बाबर उलझन में फंस गया .हालाँकि फरगना में समलैंगिक सम्बन्ध को वैधता प्राप्त थी लेकिन आयेशा बेगम को इससे सख्त चिढ थी. बाबर ने जल्द ही आयेशा से शादी कर ली लेकिन वो बबुरी को भूल नहीं पाया .बाबर की शादी के बाद बबुरी उससे दूर चला गया .उसकी मुहब्बत में बाबर दीवानों की तरह गली-गली भटकता रहता . परन्तु जब बाबर ने बाद में उसे एक बार आगरा की गली में देखा तो उसने स्वयं बाबरनामा में लिखा, वह लड़का मिल गया जो हमारी सोहब्बत में रह चुका था. हम उससे आंखें नहीं मिला पाये, क्योंकि अब हम बादशाह हो चुके थे. ऐसे किस्सों से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाबर कितना अय्याश किस्म का था.

बाबर की कट्टरता और क्रूरता को इसी से समझा जा सकता है कि उसने अपने पहले आक्रमण में ही बाजौर के सीधे-सादे 3000 से भी अधिक निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी. वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि बाजौर वाले विद्रोही तथा मुसलमानों के शत्रु थे. यहां तक कहा जाता है कि उसने इस युद्ध के दौरान एक पुश्ते पर आदमियों के सिरों को काटकर उसका स्तंभ बनवा दिया था. यह नृशंस अत्याचार उसने ‘भेरा’ पर आक्रमण करके भी किये. 

 
यह कहना गलत नहीं होगा कि क्रूर बाबर का भारत पर आक्रमण हर तरह से महमूद गजनवी या मोहम्मद गौरी जैसा ही थी, जिन्होंने अपने हितों के खातिर किसी भी प्रकार के नरसंहार को सही माना. जाहिर तौर पर इतिहास में ऐसे क्रूर शासकों को उनकी क्रूरता के लिए कहीं ज्यादा याद किया जायेगा
 
 
 
 

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