जानिए ! अकबर की क्रूरता के खौफनाक किस्से (Part:1)

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जवाहर लाल नेहरु द्वारा लिखित, बहुत प्रशंसित, ऐतिहासिक मिथ्या कथा, ”डिस्कवरी ऑफ इण्डिया” में जिस इस्लामी धूर्त व क्रूर को अकबर ‘महान’ कहकर स्वागत व प्रशांसित किया गया वह वास्तविकता में एक धुरीय, व्यक्तित्व है, हम यहाँ कुछ घटनाओं का वर्णन कर रहे हैं जिसे सुनने के बाद आप खुद ही अनुमान लगा सकते है अबर वास्तव में महान था या शैतान .एक बार अकबर शाम के समय जल्दी सोकर उठ गया तो उसने देखा कि एक नौकर उसके बिस्तर के पास सो रहा है. इससे उसको इतना गुस्सा आया कि नौकर को इस बात के लिए एक मीनार से नीचे फिंकवा दिया.

अगस्त 1600 में अकबर की सेना ने असीरगढ़ का किला घेर लिया पर मामला बराबरी का था न तो वह किला तोड़ पाया और न ही किले की सेना अकबर को हरा सकी… विन्सेंट स्मिथ ने लिखा है कि अकबर ने एक अद्भुत तरीका सोचा. उसने किले के राजा मीरा बहादुर को आमंत्रित किया और अपने सिर की कसम खाई कि उसे सुरक्षित वापस जाने देगा. तब मीरा बहादुर शान्ति के नाम पर बाहर आया और अकबर के सामने सम्मान दिखाने के लिए तीन बार झुका पर अचानक उसे जमीन पर धक्का दिया गया ताकि वह पूरा लेटकर (दण्डवत होकर ही ) सजदा कर सके क्योंकि अकबर महान को यही पसंद था…उसको अब पकड़ लिया गया और आज्ञा दी गयी कि अपने सेनापति को कहकर आत्मसमर्पण करवा दे ,सेनापति ने मानने से मना कर दिया और अपने लड़के को अकबर के पास यह पूछने भेजा कि उसने अपनी प्रतिज्ञा क्यों तोड़ी.?

तब ऐतिहासिक अकबर ‘महान’ ने बच्चे से पूछा कि क्या तेरा पिता आत्मसमर्पण के लिए तैयार है?तब बालक ने कहा कि उसका पिता समर्पण नहीं करेगा चाहे राजा को मार ही क्यों न डाला जाए यह सुनकर अकबर महान ने उस बालक को मार डालने का आदेश दिया इस तरह झूठ के बल पर अकबर महान ने यह किला जीता..

अकबर ने अपने को रूहानी ताकतों से भरपूर साबित करने के लिए कितने ही झूठ बोले. जैसे कि उसके पैरों की धुलाई करने से निकले गंदे पानी में अद्भुत ताकत है जो रोगों का इलाज कर सकता है. ये वैसे ही दावे हैं जैसे मुहम्मद साहब के बारे में हदीसों में किये गए है अकबर के पैरों का पानी लेने के लिए लोगों की भीड़ लगवाई जाती थी. उसके दरबारियों को तो यह अकबर के नापाक पैर का चरणामृत पीना पड़ता था ताकि वह नाराज न हो जाए…!! 

नवरत्नों में से एक और मान सिंह जो देश में पैदा हुआ सबसे नीच गद्दार था, ने अपनी बहन जहांगीर को दी. और बाद में इसी जहांगीर ने मान सिंह की पोती को भी अपने हरम में खींच लिया. यही मानसिंह अकबर के आदेश पर जहर देकर मार डाला गया और इसके पिता भगवान दास ने आत्महत्या कर ली… इन नवरत्नों को अपनी बीवियां, लडकियां, बहनें तो अकबर की खिदमत में भेजनी पड़ती ही थीं ताकि बादशाह सलामत उनको भी सलामत रखें. और साथ ही अकबर महान के पैरों पर डाला गया पानी भी इनको पीना पड़ता था .

अकबर की क्रूरता के कुछ किस्से हम आपके के लिए कल भी लेकर आयेंगे .तब तक कीजिये इंतज़ार 

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