जब शिवाजी महाराज के हमशक्ल शिवा कासिद ने खुद की बलि दे बचाई महाराज की जान

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औरंगजेब की कैद से निकल जाने के बाद बादशाह ने शिवाजी महाराज को सबक सिखाने के लिए अपने प्रमुख सेनापति सिद्दी जौहर को भेजा जो  शिवाजी महाराज के पीछे-पीछे ही  पन्हालगढ़ आ धमका। पन्हालगढ़ में शिवाजी को लगभग 4 महीने हो गए थे। महाराज ने अपने कुछ गिने-चुने लोगों से मंत्रणा कर एक साहसी व्यूह रचना तैयार की। इसके तहत दुश्मन को महाराज के समर्पण का सपना दिखाना और दूसरी तरफ गुप्तचरों के बताए मार्ग से विशालगढ़ को निकल जाना था।यहाँ से निकलने के लिए शिवाजी महाराज को उनके निजी हज्जाम और हमशक्ल शिवाजी कासिद ने स्व्ताज के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया .इस वीडियो में देखिये शिवा कासिद की पूरी कहानी …

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