चंदेरी का युद्ध :मेदिनी राय की हार से राजपूतों के गौरव को गहरी ठेस लगी

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खानवा युद्ध में राजपूतों को हराने के बाद बाबर कि नजर अब चंदेरी पर थी। उसने चंदेरी के तत्कालीन राजपूत राजा से वहाँ का महत्वपूर्ण क़िला माँगा और बदले में अपने जीते हुए कई क़िलों में से कोई भी क़िला राजा को देने की पेशकश की। परन्तु राजा चंदेरी का क़िला देने के लिए राजी ना हुआ। तब बाबर ने क़िला युद्ध से जीतने की चेतावनी दी। बाबर के कई प्रस्तावों के बाद भी मेदनीराय ने संधि करने से मना कर दिया। खानवा में बाबर की सेना का सामना कर चुके मेदनी राय खंगार और उनके वीरों ने मुगलों के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। बाबर के प्रलोभनों को नकार कर मेदनी ने बाबर से युद्ध करना स्वीकार किया।

चंदेरी का क़िला आसपास की पहाड़ियों से घिरा हुआ था। यह क़िला बाबर के लिए काफ़ी महत्व का था। बाबर की सेना में हाथी, तोपें और भारी हथियार थे, जिन्हें लेकर उन पहाड़ियों के पार जाना दुष्कर था और पहाड़ियों से नीचे उतरते ही चंदेरी के राजा की फौज का सामना हो जाता, इसलिए राजा आश्वस्त व निश्चिन्त था। कहा जाता है की बाबर अपने निश्चय पर दृढ़ था और उसने एक ही रात में अपनी सेना से पहाड़ी को काट डालने का अविश्वसनीय कार्य कर डाला। उसकी सेना ने एक ही रात में एक पहाड़ी को ऊपर से नीचे तक काटकर एक ऐसी दरार बना डाली, जिससे होकर उसकी पूरी सेना और साजो-सामान ठीक क़िले के सामने पहुँच गये।सुबह राजा अपने क़िले के सामने पूरी सेना को देखकर भौचक्का रह गया। परन्तु राजपूत राजा ने बिना घबराए अपने कुछ सौ सिपाहियों के साथ मुग़लों की विशाल सेना का सामना करने का निर्णय लिया। तब क़िले में सुरक्षित राजपूत स्त्रियों ने आक्रमणकारी सेना से अपमानित होने की बजाये स्वयं को ख़त्म करने का निर्णय लिया। एक विशाल चिता का निर्माण किया और सभी स्त्रियों ने सुहागनों का श्रृंगार धारण करके स्वयं को उस चिता के हवाले कर दिया।

जब बाबर और उसकी सेना क़िले के अन्दर पहुँची तो उसके हाथ कुछ ना आया। मध्ययुगीन इतिहास में चंदेरी का जौहर अब तक के इतिहास का सबसे विशाल जौहर माना जाता है। जब बाबर की सेना किले के अन्दर पहुँची तो उसके हाथ कुछ ना आया। राजपूतों का शौर्य और क्षत्राणियों के जौहर के इस अविश्वसनीय कृत्य वह इतना बौखलाया की उसने खुद के लिए इतने महत्त्वपूर्ण किले का सम्पूर्ण विध्वंस करवा दिया तथा कभी उस का उपयोग नहीं किया। युद्ध में राजपूत सेना की हार हुई। राजा मेदिनी राय ने बाबर से संधि कर उसकी अधीनता को स्वीकार कर लिया और संधि के अनुसार मेदिनी राय की दो पुत्रियों का विवाह बाबर के पुत्र कामरान एवं हुमायूँ से कर दिया गया।

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