जब माधो सिंह ने धोखे से जयपुर में करवाया मराठों का नरसंहार

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जयपुर के संस्थापक जयसिंह द्वितीय के पुत्र ईश्वरी सिंह अपने पिता की मृत्यु के बाद गद्दीनशीन हुए लेकिन अपने ही सौतेले भाई माधोसिंह प्रथम से हमेशा परेशान रहे थे।माधोसिंह अपने ननिहाल उदयपुर के सहयोग से गद्दी पर बैठने की हसरत रखते थे। माधोसिंह के षड्यंत्र से सेनापति हरगोविंद नाटाणी ने महाराजा ईश्वरी सिंह को सैनिक क्षमता के बारे में कभी सही जानकारी नहीं दी।उधर माधोसिंह ने इंदौर के शासक मल्हार राव को जयपुर पर आक्रमण करने के लिए तैयार कर लिया। होलकर सेना जयपुर की दहलीज पर आ खड़ी हुई।तो सेनापति नाटाणी ने महाराजा को कहा कि अब वह कुछ नहीं कर सकते।

इस सदमे से ईश्वरी सिंह ने आत्महत्या कर ली। इसके बाद माधोसिंह राजगद्दी पर आसीन हो गए। उस समय होलकर की फौज जयपुर पर आक्रमण करने के लिए जयपुर राज्य का एक बड़ा हिस्सा मांग रही थी।माधोसिंह को होलकर की यह मांग अस्वीकार थी। माधोसिंह ने शहर की चारदीवारी पार करते जयपुर शहर घूमने आए मराठा सैनिकों को छलपूर्वक अपने सैनिकों और नागरिकों से घिरवा दिया।सेना के साथ शहरवासियों ने मराठा सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। यह 20 जनवरी, 1951 का दिन था जब गुलाबी शहर मराठों के खून से लाल हो गया था। इसमें 3 हजार मराठाओं की मौत हुई और 1 हजार सैनिक घायल हुए।मृत सैनिकों की लाशों को बैलगाड़ी और ऊंटगाड़ियों में लादकर शहर से दूर फेंका गया। इस नरसंहार घटना के बारे में बहुत कम लिखा गया है।

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