हमीरपुर का किला :किले में मौजूद खजाने की रक्षा करते हैं नागराज

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हमीरपुर “खजांची किले” के नाम से मशहूर सुजानपुर किले में आज भी राजा संसार चंद का खजाना मौजूद है।लेकिन आज भी इस खजाने के रहस्य से कोई पर्दा नहीं उठा पाया है। न ही इस खजाने तककोई पहुंच पाया है।कहते माना जाताकि इस खजाने की रक्षा कई सालो से नाग करते आ रहे हैं। करीब 250 साल पुराने इस किले में अरबो रूपए का खजानाछिपा हुआ है। किले में रात को अजीब सी आवाजें सुनाई देती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस किलेमें रूहानी ताकतें आज भी खजाने की रक्षा कर रही हैं। ऐसा माना जाता है कि किले केअंदर एक सुरंग है,जिसकी लंबाईकरीब 5कि.मी होगी।लेकिन इस सुरंग में आज तक कोई प्रवेश नहीं कर पाया है। रास्ता तंग व अंधेरा होनेके कारण 100मीटर से ज्यादाआगे कोई नहीं जा सकता ।

सुजानपुर किलेका निर्माण (कटोच वंश) के राजपूत परिवार ने करवाया था, जिन्होंने खुद को प्राचीन त्रिगार्ता साम्राज्य,जिसका उल्लेख महाभारत पुराण में किया गया है के वंशज होने का प्रमाण दिया था। ये हिमालय मेंमौजूद किलो में सबसे विशाल और भारत में पाये जाने किलो में सबसे पुराना किला है।खजाने की खोज व लूट के लिए सम्राट अकबर ने इस किले पर घेराबंदी की थी, परन्तु वो इसमें असफल रहा। इसके पश्चात सं 1620 में, अकबर के पुत्र जहांगीर ने चंबा के राजा (जो इस क्षेत्र के सभी राजाओ में सबसेबड़े थे) को मजबूर करके इस किले पर कब्ज़ा कर लिया। मुग़ल सम्राट जहांगीर ने सूरजमल की सहायता से अपने सैनिकों को इस किले प्रवेश करवाया था। लेकिन वो भी खजाने तकनहीं पहुंच पाए थे।

संसार चंद इसकिले का प्रयोग अपने पडोसी राज्य के राजाओ को कैद करने के लिए किया था जो उनकेखिलाफ हुए षड्यंत्र का कारण बन गया। सिखों और कटोचो के बीच हुए एक युद्ध के दौरान, किले के द्वार को आपूर्ति के लिए खुल रखा गयाथा। लेकिन किले के खजाने का राज भी राजा संसाद चंद के साथ ही दफन हो गया है।बहरहाल कई नाकाम कोशिशों के बाद भी खजाने का राज व नागराजों के किस्सें आज भीरहस्य बने हुए हैं।

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