जानिए ! क्या है तबलीगी जमात का इतिहास

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तबलीगी का मतलब होता है अल्लाह की कही बातों का प्रचार करने वाला. जमात का मतलब होता है समूह, यानी अल्लाह की कही बातों का प्रचार करने वाला समूह. दरअसल, तबलीगी जमात से जुड़े लोग पारंपरिक इस्लाम को मानते हैं और इसी का प्रचार-प्रसार करते हैं. इसका मुख्यालय दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित है. कांधलवी पहली जमात दिल्ली से सटे हरियाणा के मेवात इलाके के नूह कस्बे लेकर गए थे. वहां मेवाती समुदाय को नमाज, कलमा सहित इस्लामिक शिक्षा सिखाने पर जोर दिया. तबलीगी जमात का काम आज दुनियाभर के लगभग 213 देशों तक फैल चुका है। बहरहाल आइये डालते हैं नज़र इस समुदाय के इतिहास पर..

मुगल काल में कई लोगों ने इस्लाम धर्म कबूल किया था.इसके पीछे इस्लाम के प्रति सच्ची श्रद्धा नहीं बल्कि डर और प्रलोभन था जो मुग़ल शासकों द्वारा दिया जाता था. ये लोग मुस्लिम तो बन गए लेकिन फिर भी वो हिंदू परंपरा और रीति-रिवाज का ही पालन कर रहे थे. भारत में अंग्रेजों की हुकूमत आने के बाद आर्य समाज ने उन्हें दोबारा से हिंदू बनाने का शुद्धिकरण अभियान शुरू किया था, जिसके चलते मौलाना इलियास कांधलवी ने इन लोगों को मुस्लिम बनाए रखने की एक मुहिम छेड़ दी .उन्होंने इस्लाम की शिक्षा देने का काम शुरू किया. इसके लिए उन्होंने 1926-27 दिल्ली के निजामुद्दीन में स्थित मस्जिद में कुछ लोगों के साथ तबलीगी जमात का गठन किया. इसे मुसलमानों को अपने धर्म में बनाए रखना और इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार और इसकी जानकारी देने के लिए शुरू किया.

तबलीगी जमात का पहला धार्मिक कार्यक्रम भारत में 1941 में हुआ था, जिसमें 25,000 लोग शामिल हुए थे. 1940 के दशक तक जमात का कामकाज भारत तक ही सीमित था, लेकिन बाद में इसकी शाखाएं पाकिस्तान और बांग्लादेश तक फैल गईं.तबलीगी जमात के मरकज से ही अलग-अलग हिस्सों के लिए तमाम जमातें निकलती हैं. इनमें कम से कम तीन दिन, पांच दिन, दस दिन, 40 दिन और चार महीने की जमातें निकलती हैं.तबलीगी जमात के एक जमात (समूह) में आठ से दस लोग शामिल होते हैं. इनमें दो लोग सेवा के लिए होते हैं जो कि खाना बनाते हैं. जमात में शामिल लोग सुबह-शाम शहर में निकलते हैं और लोगों और दुकानदारों से नजदीकी मस्जिद में पहुंचने के लिए कहते हैं. सुबह 10 बजे ये हदीस पढ़ते हैं और नमाज पढ़ने और रोजा रखने पर इनका ज्यादा जोर होता है. जमात हर साल देश में एक बड़ा कार्यक्रम करता है, जिसे इज्तेमा कहते हैं. इसमें दुनियाभर के लाखों मुसलमान शामिल होते हैं.आजकल इस जमात की कमान मौलाना साद के हाथों में है .

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