जानिए ! कैसे महमूद के गुलाम मुहम्मद गौरी ने भारत से मिटाया गजनी वंश का नामो-निशाँ

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भारत के इतिहास में ऐसे कई शासक हुए जो अपने पूर्ववर्ती शासकों के गुलाम थे. लेकिन जैसे ही उन्हें मौक़ा मिला उन्होंने ना केवल अपने मालिकों को ठिकाने लगाया बल्कि उसके पूरे राजवंश का सफाया कर अपना नया राजवंश स्थापित किया .मुहम्मद गौरी की दास्ताँ भी कुछ ऐसी ही है .गौरी ,महमूद गजनवी का गुलाम था. महमूद गजनवी ने भारत को आर्थिक और सैनिक दृष्टि से कमजोर जरूर किया लेकिन उसने भारत में मुस्लिम शासन की स्तापना नहीं की .गजनवी एक लुटेरा था और वो इसी से खुश था जबकि गौरी की महत्वाकांक्षा अलग थी .महमूद गजनी की मौत के बाद गौरी ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए.

गोर प्रदेश दस हजार फीट की उंचाई पर बसा एक कृषि प्रधान देश था. गजनवी के आक्रमण से पहले ये सभी बौद्ध थे लेकिन गजनी ने इन सबको जबरन मुस्लिम बना दिया. 1173 में गौरी ने अपने भाई की मदद से गोर और गजनी को जीत लिया और यहाँ का शासक बन गया. गजनी का शासक बनने के बाद गौरी ने भारत की तरफ कदम बढाने शुरू कर दिए .उन दिनों पंजाब में गजनी वंश का शासन था. चूँकि गौरी ने गजनी जीत लिया था इसलिए उसका मानना था कि पंजाब भी उसकी मिलकियत है . गौरी 1175 में मुल्तान के रास्ते भारत में घुसा .गौरी ने मुल्तान और सिंध को आसानी से जीत लिया .इसके बाद उसने गुजरात पर हमला बोला लेकिन वहां के शासक मूलराज द्वितीय ने उसे हरा दिया .गौरी हार कर अपने देश वापस लौट गया.

अगले ही साल गौरी पंजाब के रास्ते फिर से भारत में आ धमका .उसने पंजाब में गजनी वंश के शासक मलिक को आसानी से परास्त कर दिया.पंजाब से गजनी वंश को मिटाने के बाद उसने गजनी वंश के दुसरे शासक खुश्राव पर हमला बोला जो पेशावर का शासक था. खुश्रव की हार हुई और पेशावर पर गौरी का अधिकार हो गया. 1185 में गौरी ने स्यालकोट भी जीत लिया जो गजनी वंश का अंतिम गढ़ था. बाद में खुश्रव ने खोक्खरों की मदद से स्यालकोट वापस लेने की कोशिश की लेकिन गौरी ने धोखा देकर उसकी ह्त्या कर दी .इस तरह सम्पूर्ण पंजाब पर गौरी का अधिकार होते ही भारत से गजनी वंश का पूरी तरह सफाया हो गया .

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