क्या हुआ जब सात साल के संभा जी राजे ने औरंगजेब को कुश्ती के लिए ललकारा

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छत्रपति शिवाजी महाराज और मिर्ज़ा राजा जय सिंह के बीच हुई एक संधि के तहत महाराज अपने सात वर्षीय पुत्र शम्भू जी राजे के साथ औरंगजेब के दरबार में हाजिर हुए थे .जब भरे दरबार में औरंगजेब ने उनका अपमान किया तो महाराज दरबार छोड़ निकल गए और फिर कभी दरबार में हाजिर ना होने की कसम खा ली. लेकिन औरंगजेब अपनी जिद्द पर अड़ा था .ये स्थिति जय सिंह के पुत्र राम सिंह के लिए काफी असमंजस वाली थी क्योंकि जय सिंह ने उन्हें ही औरंगजेब के दरबार में महाराज की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा था. जब राम सिंह महाराज को दरबार में चलने के लिए राजी करने आए तो महाराज ने बीमारी का बहाना बना कर साथ चलने से इनकार कर दिया लेकिन शभु जी को राम सिंह के साथ दरबार में भेजने को राजी हो गए .लेकिन शम्भू जी से औरंगजेब की ये मुलाक़ात ऐसी रही जिसे वो पूरी ज़िन्दगी नहीं भुला पाया .आइये जानते हैं कैसी थी वो मुलाक़ात ..

राम सिंह जब शम्भू जी के साथ दरबार में पहुंचे तो औरंगजेब अपने तख़्त पर नहीं था. वो कुश्ती देखने में व्यस्त था जहाँ देश-विदेश के पहलवान अखाड़े में जोर आजमाइश में व्यस्त थे. राम सिंह शम्भू जी के साथ वहीं पहुँच गए .दोनों कुश्ती देखने लगे .इसी बीच औरंगजेब की नज़र राम सिंह के साथ खड़े शम्भू जी पर पडी .औरंगजेब ने राम सिंह को पुकारते हुए कहा -राम सिंह ये शिवा का बच्चा कुश्ती लडेगा क्या. इसे अखाड़े में उतारो. इस पर राम सिंह का कहना था की अभी इसकी उम्र काफी छोटी है .भला ये इन पहलवानों से कुश्ती कैसे लडेगा .राम सिंह औरंगजेब का मंसूबा समझ चुके थे .औरंगजेब इस कुश्ती के बहाने संभु जी की ह्त्या करवाना चाहता था .राम सिंह इसी उधेड़बुन में फंसे हुए थे कि शम्भू जी गरज उठे .उन्होंने औरंगजेब से कहा -मैं कुश्ती जरूर लडूंगा लेकिन इन टट्टुओं से नहीं .बल्कि आपके शाह्जादों से .या फिर बादशाह चाहें तो वो खुद भी जोर आजमाइश कर सकते हैं.समभा जी की ये हिमाकत देख औरंगजेब सन्न रह गया .उसने अपने मुंशी असद खान से कहा-खान एक दिन देख लेना एक दिन मुग़ल सल्तनत के लिए शिवा से ज्यादा मुश्किल ये शिवा का बच्चा खड़ी करेगा .ये कहता हुआ औरंगजेब बैठक से उठ कर नमाज पढने चला गया .

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