Mahmood Gaznavi और Muhammad Gauri : दोनों में से किसने हिन्दुस्तान को ज्यादा नुकसान पहुंचाया

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भारत के इतिहास में महमूद गजनवी और मुहम्मद गौरी दो ऐसे शख्स हुए जिसने हिन्दुस्तान की संस्कृति और सभ्यता को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई दोनों ही कट्टर मुसलमान .क्रूर और लुटेरा था जिसका मकसद देश को लूटना था लेकिन दोनों की महत्वाकांक्षा अलग-अलग थी .गजनवी जहाँ लूट-पाट से ही संतुष्ट हो गया वहीं गौरी हिन्दुस्तान का बादशाह बनना चाहता था .आइये डालते हैं गजनवी और गौरी की शख्सियत पर नज़र

महमूद गजनवी एक जन्मजात सेनापति था और भारत में उसके सभी आक्रमण सफल हुए जबकि गौरी की खासियत उसकी धूर्तता और मार खाकर उफ़ ना करने की उसकी आदत थी. गौरी भारत में कई बार हारा और भागा लेकिन बार-बार यहाँ आता रहा. गौरी की ज़िंदा वापसी भारतीय राजाओं के चरित्र के बारे में भी काफी कुछ कहती है. भारतीय राजा उसे हारने के बाद जीवित क्यों छोड़ देते थे ये समझना मुश्किल है. गौरी,गजनवी की तरह लूट-पाट में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेता था बल्कि वो हराए गए पूरे राज्य को ही अपने अधीन कर लेता था. गौरी का उद्देश्य भारत में इस्लामी राज्य स्थापित करने का था जबकि गजनी का मकसद धन एकत्रित करना था. गौरी में परिस्थितियों को समझने और उसके मुताबिक़ खुद को ढाल लेने की अद्भुत योग्यता थी. गौरी ने भारतीय राजाओं को पराजित करने के बाद उसे मारने से ज्यादा उनका सहयोग हासिल करने की कोशिश की. जैसे .तराइन की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान को हारने और उन्हें बंदी बनाने के बाद उसने अजमेर का शासन चौहान के बेटे को और दिल्ली का शासन गोविन्द राय के बेटे को सौंप कर उन्हें अपना गुलाम बनाया .इससे देशी राजाओं की एकता का ख़तरा भी नहीं रहा.

गजनी और गौरी दोनों को ही अपने मूल स्थान से प्रेम रहा .गजनवी ने अपने मूल प्रदेश को समृद्ध बनाने में ध्यान लगाया तो गौरी ने भारतीय राज्यों को अपने अधीन करने में .हालाँकि इसी कोशिश में उसकी ह्त्या भी हो गई .भारत में उसके विजित प्रदेशों पर उससे ज्यादा सफलतापूर्वक शासन उसके गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने किया जिसे दिल्ली का पहला मुसलमान सुलतान माना जाता है .

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