जानिए ! सलीम ने कैसे हकीम की मदद से अकबर को ठिकाने लगाया था

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मुग़ल बादशाहों में अकबर शायद सबसे सुखी बादशाह रहा होगा. उसके साम्राज्य का विस्तार काफी दूर-दूर तक था और शायद सबसे शांतिपूर्ण भी. लेकिन उसका ये सुकून तभी तक कायम रहा जब तक उसके बेटे सलीम के दिल में राजसत्ता हिलोरें नहीं लेने लगी .जैसे ही सलीम को सुलतान बनने का शौक चर्राया उसने अपने बाप के लिए मुश्किलें खड़ी करनी शुरू कर दी .उसने अकबर को एक बार जहर देकर भी मारने की कोशिश की लेकिन अकबर बड़ा सख्तजान निकला और बच गया .लेकिन सलीम ने हार नहीं मानी और अपनी साजिशों में जुटा रहा .

3 अक्टूबर 1605 को अकबर बीमार पड़ा.उसे पेचिश की शिकायत थी .सलीम ने इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोडी .जब अकबर को सलीम की हरकतों के बारे में पता चला तो उसे काफी चोट पहुँची .मान सिंह और अजीज कोका जैसे अकबर के सरदार सलीम को गिरफ्तार कर उसके बेटे खुसरो को सम्राट बनाना चाहते थे. जब सलीम को मान सिंह की इस योजना के बारे में पता चला तो सलीम ने अकबर के हकीम को डरा-धमका कर अपने पक्ष में कर लिया .अली नाम के इस हकीम ने अकबर को जल्दी जल्दी निपटाने के लिए दवाइयों का अतिरिक्त डोज देना शेरू कर दिया. दवाइयों के इस ओवरडोज के कारण अकबर को बुखार आ गया और उसे पेशाब से सम्बंधित रोग हो गया.

11 अक्टूबर तक ये तय हो चुका था कि अकबर का आख़िरी समय आ चुका है .हकीम अली की मौजूदगी में सलीम अपने बाप से मिलने आया .उसने अपने हाथों से अकबर को दवा पिलाई और अकबर के पास रखी शाही पगड़ी और तलवार धारण कर ली. बीमार अकबर अपने बेटे की इस हरकत को कातर नज़रों से देखता रहा. इस घटना के बाद भी अकबर 14 दिनों तक और ज़िंदा रहा और सलीम की नाफ़रमानी को बर्दाश्त करता रहा .आखिरकार 25 अक्टूबर की अर्धरात्रि को अकबर ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. बादशाह बनते ही सलीम उर्फ़ जहाँगीर ने हकीम अली को राजवैद्य घोषित कर दिया .

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