जानिए ! कट्टर मुस्लिम शासक मुहम्मद गौरी को भारत का पहला धर्मनिरपेक्ष शासक क्यों कहा जाता हैं

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भारत में सर्वप्रथम मुस्लिम शासन को स्थापित करने वाले मौहम्मद गौरी ने सांप्रदायिक सौहा‌र्द्र का अनूठा उदाहरण पेश किया। पृथ्वीराज चौहान के साथ दशकों तक जूझने के बाद दिल्ली का तख्त-ओ-ताज हासिल करने वाले मौहम्मद गौरी ने भी अपना सर्वप्रथम स्वर्ण निर्मित सिक्का देवी लक्ष्मी को ही समर्पित किया। इन सिक्कों पर एक ओर स्वयं मौहम्मद बिन साम देवनागरी लिपी में अंकित हैं तो दूसरी ओर पद्मासना देवी लक्ष्मी विराजमान हैं।दरअसल इसके पीछे गौरी ने हिन्दू जनता को नई मुद्रा के चलन को स्वीकार न करने के रणनीतिक उपाय के रूप में हिन्दू शासकों, चौहान और तोमर वंशों के सिक्कों के प्रचलन को जारी रखा. उस समय भी हिन्दी भाषा, जनता की भाषा थी और गोरी अपने शासन की सफलता के लिये भाषा का आश्रय लेना चाहता था. वो हिन्दू जनता को यह भरोसा दिलाना चाहता था कि यह केवल व्यवस्था का स्थानान्तरण मात्र है. हालांकि बाद में बहुत कुछ उसके शासन काल में बदलता चला गया.

अकबर ने भी ऐसी ही कोश‍िश की थी, अकबर ने अपने शासनकाल में राम सिया के नाम पर एक सिक्का जारी किया था.चांदी के इस सिक्के पर राम और सीता की तस्वीरें उकेरी गई थीं , इसके दूसरी तरफ कलमा खुदा हुआ था. इतिहासकार इरफान हबीब इस सिक्के जैसी कुछ बातों के आधार पर अकबर को सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने वाला शासक बताते हैं.

मैसूर के हिंदू शासकों को हराकर अपना साम्राज्य स्थापित करने वाले प्रतापी सुल्तान हैदर अली द्वारा प्रचलित सिक्कों में भी धार्मिक सद्भावना का अनोखा मेल देखने का मिलता है। अपने पूर्ववर्ती हिंदू शासकों की ही भांति उन्होंने पगोड़ा नामक स्वर्ण मुद्राओं का प्रचलन अपने साम्राज्य में किया। इन सिक्कों पर एक ओर अरबी लिपी में हैदर अली तो दूसरी ओर भगवान शिव-पार्वती का दक्षिण भारतीय शैली में अंकन कराया। इन स्वर्ण सिक्कों का वजन 3.5 ग्राम है।

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