मेवाड़ नहीं बल्कि अकबर और महाराणा प्रताप की दुश्मनी की वजह थी इस रानी की प्रेम कहानी

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महाराणा प्रताप और अकबर के बीच दुश्मनी भारतीय इतिहास में दो बड़े शासकों के बीच युद्ध की गाथा है. लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस युद्ध के पीछे की असली वजह एक प्रेम कहानी थी.मेवाड़ पर अधिकार से ज्यादा अकबर को महाराणा प्रताप के पिता उदय सिंह की यह बात बेहद अखरी थी कि उन्होंने मांडू के सुल्तान बाज़ बहादुर को शरण दी थी. बाज़ बहादुर मुसलमान और उसे शरण मेवाड़ के हिंदू राजा उदय सिंह ने दी. यह भी हैरानी देखिए कि मुसलमान सुल्तान पर हमला मुसलमान अकबर ने किया.

मांडू के सुलतान बाज बहादुर की रानी रूपमती की ख़ूबसूरती की चर्चा सुन अकबर उसे अपनी हरम की रौनक बनाने का ख्वाब देखने लगा .लेकिन जब बाज बहादुर उसके इस ख्वाब के आड़े आया तो उसने बाज बहादुर पर हमला करवा दिया. इस लड़ाई में बाज बहादुर की पराजय हुई . रानी रूपमती को जब अपने पति और सेना के पराजय की खबर मिली तो उसने अकबर के सेनापतियों के हाथ पड़ने से पहले विष खाकर अपने प्राण त्याग दिए. बाज़ बहादुर जान बचाकर भाग निकला. महाराणा उदयसिंह ने उसे शरण दे दी. महाराणा के सहयोग से बाज़ बहादुर एक बार फिर पराजय से उठ खड़ा हुआ और उसने अकबर से मांडू को छीन लिया. लेकिन कुछ समय बाद उसने फिर इसे खो दिया और अंतत: कई साल भटकने के बाद बाज़ बहादुर ने नागौर में अकबर के आगे आत्मसमर्पण कर दिया और उसके सेवकों में शामिल हो गया. लेकिन अकबर मेवाड़ के इस व्यवहार को भूल नहीं सका.

1567 में अकबर ने मांडलगढ़ की गढ़ी पर हमले का आदेश दिया .यह उदयपुर के महाराणाओं का ऐसा सुदूर इलाका था, जहां रावत बल्लो सोलंकी को कमान दी हुई थी. बल्लो सोलंकी आसफ़ ख़ान और वज़ीर ख़ान के आगे टिक नहीं पाया. . मांडलगढ़ विजय की इस छोटी सी घटना ने चित्तौड़ विजय और फिर महाराणाओं के साथ एक लंबे संघर्ष का सूत्रपात किया. इसलिए महाराणा प्रताप दरअसल जब हल्दीघाटी का युद्ध लड़ रहे थे तो ये सिर्फ उनकी लड़ाई नहीं थी. अकबर की आंखों में लंबे समय से किरकिरी बने मेवाड़ की तरफ महाराणा प्रताप एक नैतिक जंग भी लड़ रहे थे. हालांकि हल्दीघाटी के युद्ध में मुगल सेना और जयपुर के राजा मानसिंह की जीत हुई.हल्दीघाटी की युद्ध में जीत अकबर के लिए कुछ खास साबित नहीं हुई थी. क्योंकि न तो महाराणा प्रताप उसके हाथ आए थे और न ही कोई सहयोगी. इस युद्ध के बाद महाराणा प्रताप पूरी जिंदगी ताकतवर मुगल साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ते रहे.

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