Salim Shah Suri:जानिए ! शेरशाह के निकम्मों वारिस के बारे में

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शेरशाह या शेरशाह सूरी को भारत के इतिहास का सबसे बुद्धिमान शासक माना जाता है. उसने हुमायूं को भारत से खदेड़ कर और राजपूतों को जीतकर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की. शेरशाह के बारे में काफी जानकारी उपलब्ध है लेकिन उनके उत्तराधिकारियों के बारे में काफी कम लोग जानते हैं.अगले कुछ एपिसोड में हम शेरशाह के वारिसों के बारे में बताने जा रहे हैं .इस कड़ी में सबसे पहले बात करते हैं शेरशाह के बेटे सलीम शाह सूर की
1554 में शेरशाह की मृत्यु हो गई .उसके बाद सलीम शाह गद्दी पर बैठा. इसे इस्लाम शाह के नाम से भी जाना जाता है.

एक शासक के तौर पर सलीम शाह काफी कमजोर और शक्की था. शेरशाह का असली वारिस शरेशाह का बड़ा बेटा आदिल खान था लेकिन सरदारों की मेहरबानी से गद्दी सलीम को मिली .इससे बौखलाया आदिल खान हमेशा सलीम के विरुद्ध गोटियाँ बिछाता रहता. उसने कई बार आदिल खान को कैद करने की योजना बनाई लेकिन असफल रहा .आदिल खान ने मेवात के सरदार खवास खान के साथ मिलकर सलीम शाह पर हमला बोला लेकिन पराजित हो गया और भाग गया .फिर कभी उसका पता ही नहीं चला.

सलीम शाह के शासन के तरीके से उनके सरदार नाखुश थे .इसलिए उन्हें रास्ते से हटाने की कोशिशों में जुटे रहते .कई बार उसे मारने का भी षड्यंत्र रचा गया लेकिन वो भाग्यशाली था कि बच गया. सलीम शाह का साला मुजारिब खां विद्रोहियों के साथ मिला हुआ था. जब शाह को ये बात पता चली तो उसने उसके वध का आदेश सूना दिया. लेकिन अपनी बीबी की धोखेबाजी के कारण मुजारिब खां को इसका पता चल गया और वो वहां से भाग निकला .
इसी बीच गक्खरों ने विद्रोह कर दिया जिन्हें कुचलने के दौरान सलीम शाह बुरी तरह घायल हो गया और बीमार हो गया. उसने अपनी बीबी को शासन का भार सौंप दिया .जल्द ही सलीम शाह की मौत हो गई और उन्हें सासाराम में अपने पिता के मकबरे के पास दफना दिया गया .

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