जब औरंगजेब ने अपने बेटे को दी 6 महीने बाल-दाढ़ी ना कटवाने की सज़ा

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औरंगजेब अपनी पूरी ज़िन्दगी में जितना परेशान अपने दुश्मनों से नहीं रहा उससे ज्यादा परेशान अपने बेटों से रहा .खासकर बेटे मुअज्जम से जो उसके बाद बहादुरशाह प्रथम के नाम से उसका वारिस बना .मुआज्ज़म अपने बाप औरंगजेब से बेहद नफरत करता था. उसमें ये विद्रोह बचपन से ही मौजूद था . 20 की उम्र में औरंगजेब ने उसे दक्खन का गवर्नर बना कर भेजा .1663 में इसने पुणे पर हमला कर दिया लेकिन शिवाजी महाराज द्वारा पकड़ लिया गया .महाराज की कैद से आजाद होते ही इसने अपने बाप के खिलाफ ही विद्रोह कर दिया लेकिन औरंगजेब ने इस विद्रोह को दबा दिया.

1680 में इसने फिर बगावत कर . पर पकड़ लिया गया. अबकी बार निगरानी और कड़ी हो गई.1681 में औरंगज़ेब ने मुआज्ज़म को सौतेले भाई मुहम्मद अकबर के विद्रोह को रोकने के लिये दक्कन भेजा पर ये जान-बूझकर लड़ाई हार गया. 1687 में औरंगज़ेब ने उसे गोलकोंडा के राजा अबुल हसन को हराने के लिए भेजा . पर मुआजाम ने उससे उससे यारी कर ली. बौखलाए औरंगज़ेब ने मुआज्ज़म को कैद कर लिया हरम की औरतों को उससे दूर भेज दिया. उसे छह महीने तक उसे नाखून और बाल ना काटने की सजा दी गई .1694 में औरंगज़ेब को इस पर तरस आ गया और उसे काबुल का गवर्नर बना कर भेज दिया गया .जहां वो 1707 में अपने बाप के मरने तक रहा.

19 जून 1707 को मुअज्जम बहादुरशाह प्रथम के नाम से दिल्ली का सातवां बादशाह बना.

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