पहले पति की बेटी को मल्लिका-ए-हिंदुस्तान बनाना चाहती थी नूरजहां,भाई ने ही दे दिया धोखा

0
161

जहांगीर की 20वीं बेगम मेहरुन्निसा उर्फ नूरजहां (Noorjahan) खूबसूरत होने के साथ ही बहुत काबिल महिला भी थी. नूरजहां की काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने 16 साल तक जहांगीर के नाम पर हिंदुस्तान की गद्दी संभाली. वह पहली मुगल बेगम थी, जिसके नाम से सिक्के गढ़वाए गए और शाही फरमान जारी हुए. इतिहासकार लिखते हैं कि वह वह बहुत ही साहसी महिला थी. वहीं, नूरजहां ऐसी शातिर शासक भी थी, जिसने सल्तनत के लिए भाइयों को ही आपस में लड़ावा दिया. कहा जाता है कि उसने अपनी बेटी को मल्लिका-ए-हिंदुस्‍तान बनाने के मुगलों को सियासत की बिसात पर मोहरों की तरह इस्‍तेमाल किया. हालांकि, उसकी ये इच्‍छा उसके अपने भाई आसफ खान की वजह से ही पूरी नहीं हो पाई.

नूरजहां को पहले शौहर से एक बेटी लाड़ली बेगम थी. नूरजहां के पिता अकबर के समय में काबुल (Kabul) के दीवान थे. उसके भाई असफ खान ने आगरा दरबार पर कब्जा किया हुआ था. इसको और मजबूत करने के लिए 1620 में नूरजहां ने लाड़ली बेगम का निकाह जहांगीर के चौथे बेटे शहरयार से करवाया. नूरजहां ने अपने पिता को एतमाउद्दौला का खिताब दिलवाया. इसके बाद 1625 में भाई असफ खान को लाहौर का गवर्नर नियुक्त करवाया. बाद में उसे शाहजहां का मुख्यमंत्री बनवाया और उसके बेटे शाइश्ता खान को औरंगजेब (Aurangjeb) का मुख्य सलाहकार नियुक्त कराया.
नूरजहाँ चाहती थी लाडली बेगम का शौहर शहरयार ही जहाँगीर के बाद हिन्दुस्तान का बादशाह बने .इसलिए उसने शाहजहाँ के खिलाफ साजिशें रच कर उसे राजधानी से बाहर भिजवा दिया था. जब जहांगीर का आख़िरी समय आया तो नूरजहाँ ने शहर्यार की ताजपोशी की तैयारियां शुरू कर दी लेकिन उनकी इस साजिश खुद उसका भाई आसफ खान ने उसका साथ नहीं दिया .उसने शाहजहाँ को महल में चल रही इन साजिशों की जानकारी दे दी और शाहजहाँ ने अपने ससुर की मदद से सबको बंदी बना लिया .खुद नूरजहाँ को भी कैद में डाल दिया गया .

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here