जब शाहजहाँ ने रची औरंगजेब के क़त्ल की साजिश ,बाप का भी बाप निकला औरंगजेब

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दुनिया जानती है कि शाहजहाँ को आख़िरी वक़्त उसकी ही औलाद औरंगजेब ने काफी रजो-गम दिए .लेकिन ये कम लोगों को ही पता है कि औरंगजेब को दारा के रास्ते से हटाने के लिए शाहजहाँ ने कई साजिशें रची .यहाँ तक कि शाहजहाँ ने औरंगजेब के क़त्ल की भी साजिश रच डाली .ये तो औरंगजेब किस्मत का धनी निकला वरना शाहजहाँ के हाथों उसकी मौत तय थी. आइये आपको बताते हैं की औरंगजेब के खिलाफ शाहजहाँ की ये साजिश क्यों असफल रही .

सामूगढ़ की लड़ाई में औरंगजेब के हाथों दारा की हार के बाद ये साफ़ हो गया था कि अब औरंगजेब की आंधी को वो रोक नहीं सकता .इसलिए उसने औरंगजेब को पत्र लिखा कि और विजय की शुभकानाएं देते हुए उनसे मिलने की बेताबी जाहिर की. औरन्ग्ग्ज़ेब खूब जानता था कि आगरा लौटते ही उसे गिरफ्तार कर कैद में डाल दिया जाएगा .क्योंकि दारा की हार को बादशाह आसानी से पचाने वाला नहीं है .शाहजहाँ चाहता था की किसी तरह औरंगजेब को बहला-फुसला कर किले में ले आया जाए .उसने किले के अन्दर कई सैनिकों को बाकायदा तैनात कर रखा था जो घुसते ही औरंगजेब का काम तमाम कर देते.

शाहजहाँ ऐसे ही पत्र दुसरे पुत्र शुजा को भी लिख रहा जो एक दिन औरंगजेब के हाथों में पड़ गया जिसके बाद संशय की सारी स्थिति ख़त्म हो गई. इसलिए जब दारा को हारने के बाद औरंगजेब आगरा की तरह बढ़ा तो सीमा पर ही रूका रहा और उसके सैनिक राजधानी में घुसकर कत्ले-आम मचाते रहे .पूरी तैयारी के साथ औरंगजेब किले में घुसा और शाहजहाँ के वफादारों को अपनी तरफ मिला लिया .और आखिरकार एक दिन जब वो शाहजहाँ से मिलने पहुंचा और उसे गिरफ्तार कर लिया. शाहजहाँ को कैद में रखना औरंगजेब की रणनीतिक मजबूरी भी थी क्योंकि अगर शाहजहाँ आजाद होता तो औरंगजेब के लिए घातक साबित होता .

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