जानिए ! कैसे मूर्ख माशूका के कारण सल्तनत और जान से हाथ धो बैठा मुराद बख्श

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शाहजहाँ के उत्तराधिकार की लड़ाई में औरंगजेब ने अपने दो भाइयों दारा शिकोह और शाह शुजा को मौत के घात उतरवा दिया था,तीसरा भाई मुराद जिसने मुश्किल वक्त में उसकी मदद की थी पर रहम खाते हुए उसने उसकी जान बक्श दी और उसे ग्वालियर के किले में कैद कर दिया. तीन साल कैद में रहने के बाद मुराद अपने खुले दिल के कारण औरंगजेब के सरदारों में काफी लोकप्रिय हो गया और कुछ लोग उससे सहानुभूति रखने लगे .इसी बीच उसके कुछ पुराने साथियों ने मुराद को इस कैद से छुडाने की योजना बनाई .लेकिन उसकी मूर्ख प्रेमिका ने सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया और अंततः मुराद को अपनी जान से हाथ धोना पडा .

दरअसल किले में मुराद का एक पुराना साथी खफी खान था जो मुराद को बहुत मानता था .उसने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर मुराद को इस कैद से आजाद कराने की योजना बनाई जिसके मुताबिक़ एक रस्सी की सीढ़ी बना कर किले के अन्दर लटका दी गई .योजना ये थी कि जब किले के सारे पहरेदार सो जाएं तब मुराद उस सीढ़ी के सहारे किले से बाहर निकल जाए .बाहर पहले से मौजूद सैनिक उसे वहां से लेकर भाग जाएंगे .मुराद की एक प्रेमिका थी सरसुन बाई जिसे औरंगजेब ने मुराद के साथ ही किले में कैद कर रखा था. जैसे ही मुराद का भागने का वक़्त आया बाई उसके पैरों से लिपट गई और जोर-जोर रोना शुरू कर दिया .उसके रोने की आवाज सुन सारे पहरेदार जग गए .इसकी खबर तुरत औरंगजेब तक पहुंचाई गई. औरंगजेब ने समझ लिया कि लोगों के बीच मुराद को लेकर हलचल शुरू हो गई है इसलिए इसे ज़िंदा रखना ठीक नहीं है .दूसरे ही दिन अली नकी की ह्त्या के जुर्म में फांसी की सज़ा सूना दी .इस तरह अपनी प्रेमिका के कारण मुराद अपनी जान से हाथ धो बैठा .

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