जब सोमनाथ मंदिर की लूट का बदला लेने के लिए इस हिन्दू राजा ने गजनी पर कर दिया आक्रमण

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राजा भोज परमार या पंवार वंश के नवें राजा थे। परमार वंशीय राजाओं ने मालवा की राजधानी धारानगरीसे आठवीं शताब्दी से लेकर चौदहवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक राज्य किया था। भोज ने बहुत से युद्ध किए और अपनी प्रतिष्ठा स्थापित की जिससे सिद्ध होता है कि उनमें असाधारण योग्यता थी। यद्यपि उनके जीवन का अधिकांश युद्धक्षेत्र में बीता तथापि उन्होंने अपने राज्य की उन्नति में किसी प्रकार की बाधा न उत्पन्न होने दी।

 गुजरात में जब महमूद गजनवी (971-1030 ई.) ने सोमनाथ का ध्वंस किया तो ये  दु:खद समाचार  राजा भोज तक पहुंचने में कुछ सप्ताह लग गए।  इस घटना से क्षुब्द होकर भोज ने  सन् 1026 में गजनवी पर हमला किया.  हमला इतना जबर्दस्त था कि गजनवी सिंध के रेगिस्तान में भाग खड़ा हुआ।   तब राजा भोज ने हिंदू राजाओं की संयुक्त सेना एकत्रित करके गजनवी के पुत्र सालार मसूद को बहराइच के पास एक मास के युद्ध में मारकर सोमनाथ का बदला लिया और फिर 1026-1054 की अवधि के बीच भोपाल से 32 किमी पर स्थित भोजपुर शिव मंदिर का निर्माण करके मालवा में सोमनाथ की स्थापना कर दी।  राजा भोज द्वारा लुटेरे महमूद गजनवी से सोमनाथ मंदिर का प्रतिशोध लेने के बाद विजय स्वरूप जिस शिव मंदिर का निर्माण कराया गया था, वो भोपाल से 32 किमी दूर भोजपुर में स्थित है.इस मंदिर को इसी कारण उत्तर का सोमनाथ कहा जाता है। तब इसका शिखर और कुछ हिस्सा अपूर्ण रह गया था, जिसे अब करीब 1000 साल बाद केंद्र सरकार पूर्ण कराने जा रही है। राजा भोज द्वारा तैयार कराए गए मूल नक्शे की परिकल्पना के अनुरूप ही इसे बनाया जाएगा। वह नक्शा भी प्रांगण में पाषाणखंडों पर उत्कीर्ण है।

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