Delhi Sultanate:जानिये ! मुहम्मद गौरी का गुलाम कैसे बन गया दिल्ली का सुलतान I History & Mystery

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दारा शिकोह सीरिज के बाद आज से हम आपके लिए ‘दिल्ली सल्तनत’ नामक ख़ास सीरिज ले कर आए हैं .इस सीरिज में में हम पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद तुर्क और अफगान शासकों के समय काल की बात करेंगे . 1206 से 1526 तक भारत पर शासन करने वाले पाँच वंश के सुल्तानों के शासनकाल को दिल्ली सल्तन कहा जाता है।कुतुबुद्दीन ऐबक को भारत में तुर्की साम्राज्य का संस्थापक माना जाता है .ऐबक 1206 में  दिल्ली का सुलतान बना .वो मुहम्मद गौरी का गुलाम था और उसे गौरी के साथ कई सैनिक अभियानों में भाग लिया था .उसकी पुरी ज़िन्दगी युद्ध करते ही गुजरी .उसे गौरी की सेना का एक कुशल घुड़सवार माना जाता था इसलिए गौरी ने उसे अपने घुड़सवार दस्ते का प्रधान बना दिया था .लेकिन विडंबना देखिये कुतुब्बुद्दीन की मौत की वजह भी घोड़ा ही बना .

1206 में कुतुबुद्दीन ऐबक  दिल्ली का सुलतान बना.उसने दिल्ली पर  गजनी राज्य आधिपत्य को अस्वीकार कर एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया और उसका सुलतान बन बैठा .ऐबक गौरी का गुलाम था लेकिन उसने मुहम्मद गौरी के वंशजों के दिल्ली प्रवेश पर रोक लगा दी ताकि उसकी बादशाहत को चुनौती ना दी जा सके. बाद में उसने गजनी पर भी अधिकार कर लिया. लेकिन गौरी के वंशजों के विरोध के कारण उसे गजनी छोड़ने पड़ा लेकिन उसने गजनी के वंशजों को दिल्ली नहीं आने दिया .


उसने बंगाल और पंजाब को अपने अधीन कर उसपर दिल्ली सल्तनत की सत्ता कायम की .ऐबक केवल चार साल ही दिल्ली का सुलतान बना रह सका .1210 में पोलो जैसे खेल के दौरान उसके घोड़े ने उसे गिरा कर कुचल दिया जिससे उसकी मौत हो गई .अपने चार साल के शासन में कुतुबुद्दीन ऐबक की उपलब्धि यही रही कि उसने बाहरी आक्रमणकारियों को दिल्ली का स्वाद चखा दिया जो आगे चलाकर कई सालों तक भारत का सरदर्द बना रहा .मुगलों के शासन की स्थापना तक दिल्ली उजडती और संवरती रही /

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